रायपुर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है छत्तीसगढ़ के रायपुर पश्चिम विधानसभा सीट की। रायपुर पश्चिम छत्तीसगढ़ का वो अहम सियासी केंद्र है जहां बदलते छत्तीसगढ़ की पूरी तस्वीर देखी जा सकती है। सियासी तौर पर भी यहां के समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार राजेश मूणत यहां से विधायक हैं और इस समय जीत का चौका लगाने की तैयारी में जुटे हैं लेकिन कांग्रेस भी उनकी तगड़ी घेराबंदी में लगी है।
देश में सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शुमार रायपुर का ये वो इलाका है, जो बदलते हुए इस शहर और बदलते छत्तीसगढ़ की असली तस्वीर पेश करता है। चमचमाती सड़कें, बेहतर अधोसंरचना, विकास नालंदा परिसर, भव्य टाउनशिप और उद्योगों के कैम्पस। ये इलाका तमाम विविधताओं से भरा नजर आता है और इस क्षेत्र का ये मिजाज ही यहां की सियासत को वो पहेली बनाता है जिसे बूझना हर किसी के बस की बात नही है। लेकिन बीजेपी विधायक राजेश मूणत शायद क्षेत्र के सियासी मूड को बेहतर समझते हैं। यही वजह है कि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में रहे हैं। विकास की बात करें तो रायपुर पश्चिम में राजधानी रायपुर की बाकी सीटों के मुकाबले यहां काम ज्यादा नजर आता है। रामनगर-कोटा सड़क के चौड़ीकरण के बाद आवागमन बेहतर हुआ है। इलाके की जनता को कई अंडरब्रिज की सुविधा भी मिली है। वहीं विकास नालंदा परिसर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कोटा स्टेडियम जहां पहले शराबियों का अड्डा हुआ करता था, आज वहां खिलाड़ी अपने खेल में व्यस्त नजर आते हैं। जाहिर है बीजेपी विधायक इन विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बताते हैं तो वहीं कांग्रेस बीजेपी विधायक पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाती है।
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ऐसा नहीं है कि रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सबकुछ अच्छा ही है। क्षेत्र में मौजूद झुग्गी बस्तियों की बात करें तो आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोगों को चौबीस घंटे बिजली नहीं मिलती है। वहीं राजधानी होने के बाद भी पानी के लिए महिलाओं को एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। रामनगर, गुढ़ियारी जैसे कई इलाके हैं, जहां बीजेपी विधायक को लेकर नाराजगी देखी जा सकती है। सियासत में अपेक्षाओं का कद नेता के सियासी कद से दुगनी रफ्तार से बढ़ता है और रायपुर पश्चिम में भी ऐसे ही हालात हैं। राजेश मूणत के सामने यहां लोगो की अपेक्षाएं पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती है
राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में शामिल पश्चिम विधानसभा के सियासी समीकरण की बात करें तो परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस सीट पर बीजेपी का दबदबा है। राजेश मूणत के नेतृत्व में बीजेपी यहां कांग्रेस के मुकाबले मजबूत नजर आती है। जाति समीकरण की बात करें तो यहां साहू वोटर्स सबसे ज्यादा संख्या में है। हालांकि नतीजे बताते हैं कि कास्ट फैक्टर यहां अपना असर नहीं छोड़ पाया है। 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पिछले दो चुनावों में राजेश मूणत ने तमाम चुनौतियों के बावजूद सफलता पाई है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने उन्हें चौतरफा घेरने की रणनीति बनाई है। वैसे रायपुर पश्चिम के सियासी इतिहास की बात की जाए तो पहला नाम जेहन में आता है वो है तरूण चटर्जी का, जो सालों तक यहां की सियासत में छाए रहे। उसके बाद ही यहां से राजेश मूणत का दौर शुरू हुआ। परिसीमन से पहले रायपुर पश्चिम ग्रामीण विधानसभा सीट के अंतर्गत ही आता था। 2003 में राजेश मूणत पहली बार रायपुर ग्रामीण से चुनाव लड़े और कांग्रेस उम्मीदवार तरूण चटर्जी को हराया। 2008 में परिसीमन के बाद मूणत ने रायपुर पश्चिम से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के संतोष अग्रवाल को मात दी। लेकिन 2 बार चुनाव जीतने के बाद राजेश मूणत को 2013 के विधानसभा चुनाव में काफी पसीन बहाना पड़ा। दरअसल इस बार कांग्रेस ने युवा विकास उपाध्याय को चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव परिणाम के दिन विकास पहले राउंड से ही आगे चल रहे थे। लेकिन अंतिम राउंड में निर्णय उनके पक्ष में नहीं रहा और राजेश मूणत 6 हजार 150 वोटों विजयी होकर विधानसभा पहुंचे।
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रायपुर पश्चिम विधानसभा में रायपुर नगर निगम के 20 वार्ड शामिल हैं। इस विधानसभा की मुख्य जगहों में रामनगर, कर्मा चौक, समता कालोनी, डीडीनगर, डंगनिया, कोटा, महोबा बाजार, गुढ़ियारी, टाटीबंध, हीरापुर, रेलवे स्टेशन,जरवाय क्षेत्र प्रमुख है। एक लाख 80 हजार से ज्यादा मतदाता वाले इस क्षेत्र में जातिगत समीकरण की बात करे तो 40 हजार साहू वोटर्स बड़ी सियासी ताकत हैं। परिसीमन के बाद हुए दो विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की जीत हुई है। पार्टी इस बार भी विकास कार्य को लेकर मैदान में उतरने जा रही है तो वही कांग्रेस बुनियादी समस्या का हल नहीं मिलने की बात कहकर जनता से वोट मांगने जा रही है।
पिछली बार सीट पर राजेश मूणत और विकास उपाध्याय के बीच सियासी दंगल हुआ था, जिसमें बाजी राजेश मूणत ने मारी थी। आगामी 20 नवंबर को होने वाले चुनाव को लेकर एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस के नेता जनता के दरबार पहुंचने लगे हैं। बीजेपी से जहां राजेश मूणत को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस मे पिछला चुनाव हारने वाले विकास उपाध्याय सहित कई नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
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आगामी 20 नवंबर को रायपुर पश्चिम विधानसभा में वोट डाले जाएंगे। इसे लेकर पार्टियां पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई हैं। हालांकि बीजेपी और कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बीजेपी की बात करें तो मौजूदा विधायक राजेश मूणत चौथी बार चुनावी जंग में उतरने के लिए तैयार हैं। उनके अलावा बीजेपी में कोई दूसरा नेता फिलहाल दावेदारी करता नजर भी नहीं आ रहा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कें संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो दर्जन भर से ज्यादा नेता-कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए दावेदारी पेश की है। इनमें सबसे पहला नाम विकास उपाध्याय का है। पिछला चुनाव हारने के बाद विकास ने क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इस सूची में दूसरा बड़ा नाम युवा कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल का है।
वहीं बीजेपी की तरफ मौजूदा विधायक राजेश मूणत का कहना है। वे चौथी बार विकास कार्यो को लेकर जनता जर्नादन के बीच जाएंगे। उनका कहना है कि बीजेपी ही इकलौती ऐसी पार्टी है जो अंत्योदय की सोच रखकर विकास करती है। कांग्रेस और बीजेपी भले अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया हो। लेकिन आम आदमी पार्टी ने उत्तम जायसवाल को टिकट देकर यहां सियासी बढ़त जरूर बनाने की कोशिश की है। कुल मिलाकर रायपुर पश्चिम में इस बार सियासी घमासान दिलचस्प होने के पूरे आसार हैं। राजेश मूणत जहां पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि वो जीत का चौका लगाएं। जहां तक कांग्रेस की सवाल है उसका प्रदर्शन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा की वो अपनी अंदरूनी लड़ाई से किस तरह निपटती है ।
वेब डेस्क, IBC24