New Rule On Gau Taskari
New Rule On Gau Taskari: रायपुर। गौ संरक्षण, गौ तस्करी, गौ हत्या हमेशा से देश-प्रदेश में सियासत में बड़ा मुद्दा रहे हैं। सनातन संस्कृति में मां का दर्जा रखने वाली पूजनीय गौमाता के संरक्षण के लाख दावों के बावजूद बीते दिनों छत्तीसगढ़ में गौ तस्करी, अवैध गौ परिवहन और उसे रोकने के दौरान हिंस के कई केस सामने आए, जिससे सरकार की, पुलिस की काफी किरकिरी हुई। विरोध, प्रदर्श और जमकर सियासी विवाद भी हुआ। अब राज्य सरकार ने गौ परिपत्र जारी कर गौसंरक्षण पर अपनी मजबूत मंशा जाहिर कर दी है। इसके लिए पुलिस अफसरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। क्या है इसके प्रावधान, क्या ये महज राजनीतिक लाभ लिए है या फिर ये मील का पत्थर साबित होने वाला है। जानने के लिए देखें ये खास रिपोर्ट..
बीते दिनों प्रदेश में गौ तस्करी और गौ हत्या के बढ़ते प्रकरणों के बाद, अब सरकार ने प्रदेश में गौ तस्करी रोकने बड़ी पहल की है। साय सरकार ने गौहत्या और गौ तस्करी रोकने गौवंश परिपत्र जारी किया है, इसके तहत सरकार ने पुलिस विभाग को कृषक पशुओं की तस्करी, बिक्री और हत्या रोकने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब गौ तस्करी मालमों में पुलिस अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होगी। राज्य के पुलिस कप्तान DGP अशोक जुनेजा ने प्रदेश पुलिस के लिए परिपत्र जारी कर निर्देश दिया कि, गौ तस्करी पकड़े जाने पर पूरी रूट के पुलिस अधिकारी दोषी होंगे, गौ तस्करी केस सामने आने पर पूरी रूट के सभी पुलिस अधिकारियों की सर्विस बुक में नेगेटिव रिमार्क दर्ज होगा, 5 नेगेटिव रिमार्क के बाद अनुशासनात्मक करवाई होगी।
प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि, गौ तस्करी संज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा। गौ तस्करी करने पर 7 साल की होगी सजा और 50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। सक्षम अधिकारी की अनुज्ञा से ही गौवंश का परिवहन हो सकेगा। बगैर अनुज्ञा को गौवंश परिवहन अवैध होगा। पकड़े जाने पर गाड़ी राजसात होगी, जिसमें मालिक पर भी FIR दर्ज होगी। गौवंश तस्करी से बनाई गई संपत्ति कुर्क की जाएगी। ऐसे प्रकरणों के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी बनाए जाएंगे। इधर, गौ-परिपत्र पर विपक्ष ने सधी प्रतिक्रिया दी है।
विपक्ष का कहना कहै कि नियम-कानून अपनी जगह हैं, इनका जमीन पर कैसे और कितना पालन होता है, ये देखना होगा। बीते दिनों आरंग समेत प्रदेशभर में तेजी से सामने आए गौ तस्करी और गौ हत्या के मामलों पर विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा है। ऐसे मामलों ने पुलिस और सरकार की काफी किरकिरी कराई है। अब गौ परिपत्र में कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ पुलिसवालों की जिम्मेदारी तय कर सरकार ने हर हाल में गौवंश की रक्षा के संकल्प को जताया है। सवाल है क्या ये कदम पर्याप्त हैं, क्या ये असरकारक होगा ?