Supreme Court on Gau Hatya Order: हाईकोर्ट ने लगाया था गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर ही लगाई रोक, जानें किस राज्य से जुड़ा है मामला

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गौवध रोकने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर उच्चतम न्यायालय की रोक

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 03:45 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 03:59 PM IST

Supreme Court stay on High Court's order banning cow slaughter || Image- File Image

HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट आदेश रोका
  • तमिलनाडु सरकार की याचिका स्वीकार
  • गाय वध कानून पर सुनवाई जारी

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि राज्य में किसी गाय या बछड़े का वध न हो। (Supreme Court stay on High Court’s order banning cow slaughter) न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की ओर से 27 मई के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।

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तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के 27 मई के आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने राज्य प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि बकरीद की पूर्व संध्या 28 मई को या किसी अन्य दिन राज्य में किसी गाय या बछड़े का वध न होने दिया जाए। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, ‘‘हम इस रिट याचिका को स्वीकार करते हैं और तमिलनाडु राज्य को निर्देश देते हैं कि वह सुनिश्चित करे कि बकरीद की पूर्व संध्या या किसी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध न हो।’’

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राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि उच्च न्यायालय का यह आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है। (Supreme Court stay on High Court’s order banning cow slaughter) इस अधिनियम के तहत 10 वर्ष से अधिक उम्र वाली ऐसी गायों का वध करने की अनुमति है जो काम करने या प्रजनन के लिए अयोग्य हों। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाना आवश्यक है।

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सुप्रीम कोर्ट ने किस आदेश पर रोक लगाई?

मद्रास हाईकोर्ट के तमिलनाडु में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण रोक वाले आदेश पर।

तमिलनाडु सरकार ने आदेश को क्यों चुनौती दी?

सरकार ने कहा आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है।

तमिलनाडु कानून के तहत गाय वध कब संभव है?

10 वर्ष से अधिक उम्र और अनुपयोगी गाय का प्रमाणपत्र मिलने पर वध संभव है।