शह मात The Big Debate: धर्म के नाम पर भेदभाव.. क्या ऐसे देश चलेगा? पूर्व सांसद ने पार की सारी हदें! क्या विविधता की ताकत को नकार रहा नया भारत? देखिए ये वीडियो

Ads

Sukhbir Singh Jaunapuria Controversy Updates

  •  
  • Publish Date - February 23, 2026 / 11:48 PM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 12:18 AM IST

नई दिल्लीः मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना.. लेकिन जब सवाल दान का हो और पहचान धर्म से तय होने लगे तो बहस सिर्फ एक वीडियो की नहीं रह जाती, बल्कि देशभर में पनपती एक सोच पर सवाल भी उठाती है। राजस्थान से पूर्व सांसद सुखवीर सिंह जौनपुरिया पर आरोप है कि उन्होंने धर्म पूछ-पूछ कर कंबल बांटे। आपत्तिजनक तरीके से वर्ग विशेष के लोगों को बाहर कर दिया। वीडियो वारयल हुआ तो सियासत संग्राम चरम पर है। सवाल सीधा है कि धर्म के नाम पर ऐसा खुलेआम ऐलानिया भेदभाव? क्या ऐसे देश चलेगा? क्या विविधता में एकता की ताकत वाली बात महज किताबी हो गई है? क्या सबको साथ लेकर चलने की बात सिर्फ चुनावी जुमला मात्र है?

दरअसल, शख्स राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर का पूर्व भाजपाई सांसद सुखवीर सिंह जौनपुरिया महिलाओं को कंबल बांटकर अपनी दानशीलता की नुमाइश कर रहे हैं, लेकिन जरा इन पूर्व सांसद महोदय का लहजा तो देखेंगे तो समझेंगे कि ये दान नहीं बल्कि कोई अहसान कर रहे हैं और वो भी इस लानत भरे शब्दों के साथ। यकीन नहीं होता कि दानवीर कर्ण की महिमा गाने वाले इस देश में, जहां नेकी कर दरिया में डाल की कहावत प्रचलित है। उसी देश में एक ऐसा भी दानदाता है जो कंबल जैसी मामूली चीज को भी इस कदर जलील करने के साथ लोगों को बांटता है। अब जरा इन जनाब की खुन्नस की वजह भी जान लीजिए। पहले तो ये महिलाओं से उनका नाम पूछते हैं और आरोप के मुताबिक मुस्लिम नाम वाली महिलाओं को कंबल देने से इंकार कर देते हैं। इंकार की वजह में कहा कि मोदी को गाली देने वालों को कंबल नहीं मिलेगा।

वीडियो वायरल हुआ तो जनाब की लानत-मलामत का दौर शुरू हो गया। मामला भाजपा के पूर्व सांसद से जुड़ा था लिहाजा कांग्रेस मौके की नजाकत को भांपते हुए उन महिलाओं की रहनुमा बनकर हाजिर हो गई जिन्हें पूर्व सांसद जनौरिया ने दुत्कार दिया था। मामला भले राजस्थान से जुड़ा था लेकिन था इतना आपत्तिजनक कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बयानबाजी के तीर चलने लगे। हालांकि इस मामले में पूर्व सांसद जौनपुरिया का बयान नहीं आया है, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो ये दलील देकर पूर्व सांसद की हरकत को जायज ठहरा रहे हैं कि जब पहलगाम में पाकिस्तान के मुस्लिम आतंकवादी भारतीयों का धर्म पूछकर हत्या कर सकते हैं तो फिर धर्म पूछकर दान देने में भला क्या गलत है, लेकिन ऐसी दलील देने वाले ये भूल जाते हैं कि जिस पार्टी की सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मूलमंत्र के साथ काम कर रही हो उसी पार्टी का नेता भला धर्म के आधार पर भेदभाव कैसे कर सकता है?