अदालत ने लिया वकीलों को लाठियां बांटे जाने का संज्ञान, अपनाया सख्त रुख

Ads

अदालत ने लिया वकीलों को लाठियां बांटे जाने का संज्ञान, अपनाया सख्त रुख

  •  
  • Publish Date - May 25, 2026 / 11:46 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 11:46 PM IST

लखनऊ, 25 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सोमवार को राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित दीवानी अदालत परिसर के आसपास से अतिक्रमण हटाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों को लाठियां बांटे जाने के एक वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए इस पर कड़ा रुख अपनाया।

अदालत ने कहा, ‘‘क्या आपको लगता है कि लाठियां बांटकर आप प्रशासन को उसके कानूनी कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोक पाएंगे?’’

अदालत ने कहा कि वह आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करेगी।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने ये टिप्पणियां ‘अनुराधा सिंह और अन्य’ शीर्षक से दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कीं।

पीठ ने पिछले एक सप्ताह से जिला अदालत में न्यायिक कार्य ठप होने का संज्ञान लेते हुए इस स्थिति को गंभीर बताया।

अतिक्रमण रोधी अभियान का विरोध कर रहे वकीलों ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि नगर निगम ने अतिक्रमणों की ठीक से पहचान किए बिना ही तोड़फोड़ की कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभियान के दौरान फोटोकॉपी की एक ऐसी दुकान को भी तोड़ दिया गया जिसका किराया जिला अदालत को दिया जाता है।

अदालत ने इसके जवाब में कहा कि उसे इस घटना की जानकारी है और दुकान को गलती से नुकसान पहुंचा था। अदालत ने कहा कि प्रभावित दुकानदार को उसी जगह पर पहले ही एक दूसरी दुकान आवंटित कर दी गई है और नुकसान की भरपाई के प्रयास जारी हैं।

पीठ ने दोहराया कि अतिक्रमण के कारण इस इलाके में एंबुलेंस फंस जाती थीं और ऐसी ही एक घटना में एक मरीज की मौत भी हो गई थी।

पीठ ने यह भी कहा कि कैसरबाग स्थित पुराने तहसील परिसर की जमीन को वकीलों के चैंबर के लिए आवंटित करने की औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और बार संगठनों को इस बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया है।

भाषा सं. सलीम शोभना

शोभना