DGP अवस्थी बोले- थाना प्रभारी ने रास्ता बदलने से किया था मना, लेकिन नहीं माने विधायक मंडावी
DGP अवस्थी बोले- थाना प्रभारी ने रास्ता बदलने से किया था मना, लेकिन नहीं माने विधायक मंडावी
रायपुर: छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र हुए नक्सली हमले में दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई, वहीं इस हमले में 4 जवान भी शहीद हो गए। हमले के बाद से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। इस घटना के बाद डीजीपी अवस्थी ने मीडिया से रूबरू होकर इस घटना की जानकारी प्रदेश की जनता से साझा किया। प्रेसवार्ता में डीजी नक्सल, डीजी इंटेलिजेंस और डीआईजी नक्सल भी मौजूद रहे।
डीजीएम अवस्थी ने मीडिया से रूबरू होकर कहा कि बचेली थाना प्रभारी ने विधायक मंडावी से नक्सल हमले की आशंका से इस रोड का उपयोग करने से मना किए थे, लेकिन भीमा मंडावी नहीं मानें। समय आभाव के चलते उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा नहीं दिया जा सका, जिसका खेद है।
उन्होंने आगे कहा कि विधायक मंडवी जब किरंदुल से चुनावी सभा को संबोधित कर लौट रहे थे तो बचेली थाना प्रभारी ने उनसे डेढ़ मिनट तक बात की और उन्हें उस रास्ते से जाने से मना किया। साथ ही उन्हें खतरे की आशंका भी जताई, लेकिन मंडावी नही मानें। अगर ये रास्ता नहीं अपनाते तो उनकी जान बच सकती थी। इतने कम समय में सूचना मिलने के चलते आरओपी पार्टी की व्यवस्था नहीं किया जा सका। पूर्व सूचना मिलती तो इस घटना से बचा जा सकता था।
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इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन कटघरे में नजर आ रही है। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस घटना में षडयंत्र की बू आ रही है। अगर तत्काल कार्यक्रम बदला तो नक्सली वहां इतनी जल्दी कैसे पहुंच गए। थाना प्रभारी के कहने पर डीजी जैसे अधिकारी गैरजिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। 4 घण्टे में प्रशासन ने इतनी बड़ी घटना को मंडावी की गलती बना दी। महेन्द्र कर्मा के पुत्र छवींद्र कर्मा ने बताया उनको उस रास्ते मे जाने से रोका गया लेकिन मंडावी को जाने दिया। इस बात से साफ जाहिर है कि इस घटना को षडयंत्र पूर्वक अंजाम दिया गया है।

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