महंगी खाद…सियासी संग्राम! कोरोना से पहले ही बेहाल किसान महंगाई की दोहरी मार से कैसे बचेगा? 

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महंगी खाद...सियासी संग्राम! कोरोना से पहले ही बेहाल किसान महंगाई की दोहरी मार से कैसे बचेगा? 

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  • Publish Date - May 8, 2021 / 05:50 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:24 PM IST

रायपुर: कोरोना की दूसरी लहर के बीच किसानों को दोहरी मार पड़ी है। केंद्र सरकार ने खाद की कीमतें बढ़ाकर अन्नदाता को बड़ा झटका दिया है। खरीफ फसल लगाने की तैयारी में जुटे किसानों को इस बार रासायनिक खाद की खरीदी के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। दरअसल केन्द्र सरकार ने डीएपी, एनपीके और एमओपी के दामों में 58 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर दी है। जाहिर है खाद की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं होगा, बल्कि खेती में लागत बढ़ने से अनाज और सब्जियों की कीमतें भी बढ़ेंगी। कोरोना काल में खाद के दामों में बढ़ोत्तरी होने से कई सवाल उठ रहे हैं।

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नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले पांच माह से केन्द्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे है। मामला अभी शांत नहीं हुआ कि केन्द्र ने एक बार फिर से खाद के दामों में 58 प्रतिशत तक की वृद्धि कर किसानों को बड़ा झटका दिया है। 1150 रु की DAP प्रति बोरी अब 19 सौ रुपए में किसानों को मिलेगी। 1185 रु की NPK प्रति बोरी अब 1747 रुपए में मिलेगी तो वहीं 850 रुपए की MOP बोरी अब 1 हजार रु में मिलेगी। इसी तरह सिंगल सुपर फास्फेट के सभी प्रकार के खादों के दाम में प्रति बोरी लगभग 36 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सवाल है कि आखिर किसान खेती कर लाभ कैसे अर्जित कर पाएगा?  किसान संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि केन्द्र की मोदी सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की बात कही थी, लेकिन किसानों के विरुद्ध एक के बाद एक निर्णय लेकर केवल कॉरपोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाह रही है।

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खाद के दामों में इजाफा होने से किसानों को प्रति एकड़ औसतन चार हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। जबकि डीजल के दाम बढ़ने से पहले ही जुताई, मिंजाई और अन्य किसानी कार्यों में लागत बढ़ गई है। खाद के भाव बढ़ने पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि फर्टिलाइजर कंपनियों की मनमानी रोके और मूल्य वृद्धि को वापस ले लें। वहीं इस मुद्दे पर बीजेपी के नेता और सांसद बोलने को कतरा रहे है। हालांकि राज्यसभा सासंद रामविचार नेताम ने कहा है कि कोरोना के कारण सभी चीजों के दाम में बढ़ोत्तरी हुई है, जिसके कारण खाद के दाम भी बढ़े है। नेताम ने ये भी कहा है कि केन्द्र ने कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की है, तो वही समय-समय पर किसानों को राहत पैकेज की घोषणा भी की है।   

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जाहिर है कोरोना काल में लॉकडाउन लगने से किसानों को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में खाद की कीमतों में इजाफा होने से सवाल उठ रहा है कि अगर खर्च के अनुरुप उत्पादन नहीं हो पाया तब किसानों की क्या स्थिति होगी ? सवाल ये भी कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह और चिंता पर केंद्र किसानों की भलाई के लिए अपने फैसले वापस लेगा। सवाल ये भी कि सवाल है कोरोना से पहले ही बेहाल किसान महंगाई की दोहरी मार से कैसे बचेगा? 

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