दिल्ली में 26 लाख रुपये की ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में 10 लोग गिरफ्तार

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दिल्ली में 26 लाख रुपये की ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में 10 लोग गिरफ्तार

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 07:53 PM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 07:53 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा और देवघर इलाकों और दिल्ली-एनसीआर से चल रहे एक अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह के 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी 26 लाख रुपये से ज़्यादा की ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी में कथित तौर पर शामिल हैं। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ‘एपीके’ फाइल समेत कई तरीकों से साइबर ठगी को अंजाम देते थे।

पुलिस ने कहा कि जालसाज़ बैंक अधिकारी या अन्य सेवा प्रदाता कंपनी के अधिकारी बनकर पीड़ितों को फोन करते और ‘मैसेजिंग ऐप’ के जरिए ‘एपीके’ फाइल भेजकर इन्हें मोबाइल में डाउनलोड करने के लिए राजी करते।

दक्षिण पश्चिम दिल्ली पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित गोयल ने कहा कि एपीके फाइल को डाउनलोड करने के बाद आरोपी पीड़ित का फोन हैक कर लेते जिसके बैंकिग संबंधी जानकारी हासिल कर ओटीपी के माध्यम से उसके खाते से पैसे स्थानांतरित कर लिया करते थे।

उन्होंने बताया कि झारखंड के जामताड़ा, देवघर और हजारीबाग में लगातार चलाए गए अभियान के दौरान ये गिरफ्तारियां की गईं। ये गिरफ्तारियां वित्तीय लेन-देन और डिजिटल सबूतों के तकनीकी विश्लेषण के बाद की गईं।

पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने वरिष्ठ नागरिक कार्ड बनवाने में मदद करने के बहाने एक बुज़ुर्ग से 18.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। पीड़ित को एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए राजी किया गया, जिसके बाद अनधिकृत रूप से उनके बैंक खाते से पैसे स्थानांतरित कर लिए गए।

इस मामले में जामताड़ा में गिरोह के कथित सरगना मंजूर आलम समेत छह आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। पुलिस ने ठगी के पैसे से खरीदी गई एक एसयूवी, छह मोबाइल फ़ोन और डिजिटल सबूत भी बरामद किए।

पुलिस ने हज़ारीबाग से रवींद्र कुमार मंडल, देवघर से रामविजय कुमार दास और अंकित कुमार व गोलू कुमार को गिरफ़्तार किया है। इन पर क्रेडिट कार्ड की केवाईसी के नाम पर, एम-परिवहन पर फर्जी चालान का झांसा देकर, एपीके के जरिए धोखधाड़ी और बीएसईएस का अधिकारी बनकर धोखाधड़ी करने का आरोप है।

जांच के दौरान पुलिस ने कुल 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए।

पुलिस के अनुसार, यह लोग कई राज्यों में लोगों को निशाना बनाने के लिए गिरोह चला रहे थे जिसमें ये सिम कार्ड, मोबाइल फोन, ‘म्यूल’ (कमीशन पर मिलने वाले) बैंक खाते, यूपीआई आईडी और इंटरनेट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस ने बताया कि अब तक दक्षिण पश्चिम ज़िले में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के चार मामलों को सुलझा लिया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।

भाषा नोमान प्रशांत

प्रशांत