ओड़िशा पुलिस के सामने 10 माओवादी ने आत्मसमर्पण किया

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ओड़िशा पुलिस के सामने 10 माओवादी ने आत्मसमर्पण किया

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 07:11 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 07:11 PM IST

फूलबनी (ओड़िशा), 11 मार्च (भाषा) ओड़िशा के कंधमाल जिले में बुधवार को 10 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया । इन माओवादियों पर कुल करोड़ 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था । अधिकारियों ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा(माओवादी) की राज्य समिति के सदस्य सानू पोट्टम उर्फ नितू शामिल हैं, जिस पर 55 लाख रुपये का इनाम था।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले इन दस माओवादियों में छह महिलायें एवं चार पुरुष हैं। इन लोगों ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) संजीब पांडा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक अमितेंद्र नाथ सिन्हा, दक्षिणी संभाग बहरामपुर के पुलिस महानिरीक्षक निति शेखर, पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) दीपक कुमार एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष एक समारोह में आत्मसमर्पण किया।

उन्होंने बताया कि आत्मसर्मण करने वालों में सानू पोट्टम के अलावा संताई सलाम, लक्ष्मी मडवी (उर्फ अनुपा), सुनील टेलम, मंजुला पुनेम, रामबती अय्यम, गणेश कुंजम, सुशीला डुडी, शरीर कूहुड़म और चौड़ी योड़ी शामिल हैं। इनमें एक डिवीज़नल कमिटी सदस्य और दो एरिया कमिटी सदस्य भी हैं।

अधिकारियों ने बताया कि यह 10-सदस्यीय दल कंधमाल जिले में प्रतिबंधित संगठन के केकेबीएन (कंधमाल-कलाहंडी-बौध-नयागढ़)संभाग के तहत कार्य कर रहा था।

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी ने पांडा को अपने हथियार सौंपे, जिनमें दो इंसास राइफलें, दो स्वचालित राइफलें, तीन .303 राइफलें, दो सिंगल-शूटर्स, एक 12-बोर की पिस्तोल एवं बड़ी मात्रा में कारतूस आदि शामिल हैं।

पांडा ने कहा कि सानू पोट्टम उर्फ नितु समेत 10 माओवादी का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादी विचारधारा के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि कंधमाल में माओवादी का आधार कमजोर हुआ है, जो ओड़िशा का एकमात्र ऐसा जिला है जो अब भी एसआरई (सिक्योरिटी-रिलेटेड एक्सपेंडिचर) सूची में शामिल है।

उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के लाभ मिलेंगे, जिसमें वित्तीय सहायता और व्यवसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं, ताकि वे गरिमा के साथ समाज में पुनः शामिल हो सकें।

भाषा रंजन नरेश

नरेश