Naxal Leader Papa Rao Surrender : इतने दिन पहले ही सरेंडर करने की सोच रहा था पापाराव! आत्मसमर्पण से पहले खुद किया बड़ा खुलासा, कहा- अब संविधान के अनुसार…

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Bijapur में कुख्यात नक्सली लीडर ने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 08:40 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 08:40 PM IST

Naxal Leader Papa Rao Surrender / Image SOURCE : file

HIGHLIGHTS
  • Bijapur के कुटरू थाने में 17 नक्सलियों ने सरेंडर किया।
  • नक्सली लीडर ने संविधान के तहत काम करने की बात कही।
  • बचे साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की गई।

बीजापुर : नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन से महज कुछ दिन पहले कुख्यात नक्सली लीडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू में सरेंडर कर दिया। सभी ने कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण किया।  पापा राव ने  बयान देते हुए कहा कि वह पिछले 10 दिनों से हथियार छोड़ने के बारे में सोच रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि अब वह भारत के संविधान के अनुसार सबके लिए और जनता के हित में लड़ेंगे और काम करेंगे। उन्होंने अपने सभी बचे साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा पापा राव

आपकों बता दें की पापा राव संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उनके साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला था ।

जानें कौन है पापा राव?

आपकों बता दें की Naxalite Paparao Surrenders पापा राव का असली नाम मंगू दादा या चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 वर्ष से अधिक उम्र का यह नक्सली 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर है और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप है।

  • पापा राव पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) का एक प्रमुख चेहरा है
  • माओवादी संगठन में ऑपरेशन से लेकर रणनीतिक मामलों में उसकी अहम भूमिका रही है
  • वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव
  • दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य
  • बस्तर में कई बड़े नक्सली हमले की रणनीति तैयार करने में उसकी प्रमुख भूमिका रही है।
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।

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आत्मसमर्पण कहाँ हुआ?

Bijapur के कुटरू थाने में।

कितने लोगों ने सरेंडर किया?

कुल 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया गया।

सरेंडर करने वाले नेता ने क्या कहा?

उन्होंने संविधान के अनुसार जनता के हित में काम करने की बात कही।