नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने मंगलवार को विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए लोकसभा में कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों से संबंधित प्रस्तावित कानून उनके अधिकारों को पूरी तरह से सुरक्षित रखेगा और समुदाय को कानूनी मान्यता मिलती रहेगी।
मंत्री ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा विधेयक समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित रखने का एक पुख्ता आश्वासन है।
निर्दलीय सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव सहित कुछ सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
मंत्री ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा जताई गई आशंकाओं और आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को कानूनी मान्यता मिलती रहेगी और उनके अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे। यह अधिनियम हमारी सामूहिक अंतरात्मा की अभिव्यक्ति है।’’
मंत्री ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून ट्रांसजेंडर लोगों को सशक्त बनाने वाला है और उस समुदाय को उसका गौरव लौटाएगा, जिसे सदियों से वंचित रखा गया था।
उन्होंने उल्लेख किया कि 2019 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए एक कानून लाया गया था और अब यह संशोधन विधेयक जटिल प्रावधानों में बदलाव कर उन लोगों को सुरक्षा देने के लिए लाया गया है, जिनकी अपनी लैंगिक पहचान निर्धारित करने में खुद की कोई गलती नहीं होती।
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि इस समुदाय के लोग भी समानता के साथ जिएं। उन्हें भी अन्य लोगों की तरह अधिकार मिलें।’’ उन्होंने कहा कि यह कदम सभी वर्गों को एक समान बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
मंत्री ने कहा, ‘‘इस कानून का उपयोग केवल उन्हीं लेागों के लिए किया जाएगा, जिन्हें वास्तव में सुरक्षा की आवश्यकता है। उचित कानून के अभाव में उन्हें (ट्रांसजेंडर) गंभीर सामाजिक बहिष्कारों का सामना करना पड़ता है।’’
उन्होंने कहा कि यह विधेयक समुदाय के एक विशिष्ट वर्ग में ऐसी असुरक्षा का समाधान करने के लिए लाया गया है, जो जैविक स्थिति के कारण गंभीर सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं और जिनमें उनकी कोई गलती नहीं होती।
कुमार ने उल्लेख किया कि एक दशक पूर्व उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान को मान्यता न देना संविधान का हनन है।
मंत्री ने कहा कि ट्रांसजेंडर गंभीर सामाजिक असुरक्षा का सामना करते हैं इसलिए उनके लिए यह व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के माध्यम से पहली बार दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं। किसी भी तरह का प्रलोभन या उकसावे के जरिये किसी बच्चे को ट्रांसजेंडर के रूप में खुद को प्रदर्शित करने के लिए मजबूर करना अब दंडनीय अपराध होगा।’’
मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून में बच्चों को हानि पहुंचाने से रोकने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित कानून स्पष्ट संदेश देता है कि समाज बच्चों के साथ होने वाले किसी भी दुर्व्यवहार को सहन नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि इसके कानून का रूप लेने से प्रशासनिक स्पष्टता आएगी, समुदाय के अधिकार सुनिश्चित होंगे और ट्रांसजेंडर लोगों को सामाजिक मान्यता मिलेगी।
मंत्री के जवाब के बाद, विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक पर विरोध जताते हुए सदन से वाकआउट किया।
विधेयक में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सही और सुनिश्चित पहचान करना और उनकी सुरक्षा के लिए एक उपयुक्त परिभाषा देना जरूरी है ताकि उन्हें मौजूदा कानून का फायदा मिल सके।
संशोधन विधेयक में एक नया उपखंड जोड़ा गया है, जिसके अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्ति वह होगा जिसकी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान ‘किन्नर’, ‘हिजड़ा’ अथवा ‘जोगता’ के रूप में हो, या जन्म से ही पुरुष या महिला के शारीरिक विकास की तुलना में एक या अधिक लैंगिक विशेषताओं में जन्मजात भिन्नता वाला हो।
इसके अलावा कोई भी व्यक्ति या बच्चा, जिसे बलपूर्वक, प्रलोभन देकर, छल या सहमति के साथ या बिना सहमति के, अंग-भंग, नसबंदी, या किसी भी शल्य चिकित्सा, रासायनिक या हार्मोनल प्रक्रिया या अन्य तरीके से ट्रांसजेंडर पहचान को अपनाने, स्वीकार करने या इसे प्रदर्शित करने के लिए मजबूर किया गया हो, वह भी इस परिभाषा के दायरे में आएगा।
विधेयक में नुकसान की गंभीरता, क्षति की अपरिवर्तनीयता और बाल पीड़ितों को ध्यान में रखते हुए, श्रेणीबद्ध दंडों के साथ विशिष्ट अपराधों को परिभाषित करने का प्रस्ताव किया गया है।
जिस व्यक्ति को (ट्रांसजेंडर) पहचान पत्र जारी किया गया है और जिसे ट्रांसजेंडर घोषित किया गया है, उसे जन्म प्रमाण पत्र और अपनी पहचान से संबंधित अन्य सभी आधिकारिक दस्तावेजों में अपना पहला नाम बदलने का अधिकार होगा।
भाषा सुभाष वैभव
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