भारत में ज़मीन से जुड़े 1,092 विवाद; 1.42 करोड़ लोग प्रभावित: भूमि अधिकार आंदोलन

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भारत में ज़मीन से जुड़े 1,092 विवाद; 1.42 करोड़ लोग प्रभावित: भूमि अधिकार आंदोलन

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 10:05 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 10:05 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) भूमि अधिकार आंदोलन संगठन ने शुक्रवार को कहा कि भारत में ज़मीन से जुड़े 1,092 विवाद हैं, जिनसे लगभग 1.42 करोड़ लोग प्रभावित हैं और ये 4.47 लाख हेक्टेयर ज़मीन से जुड़े हैं।

इसने यह भी कहा कि पिछले एक साल में, ज़मीन अधिग्रहण, बेदखली, तोड़-फोड़, वन भूमि के दूसरे कामों में इस्तेमाल और विस्थापन से जुड़े विवादों के लगभग 300 मामले दर्ज किए गए हैं

आदिवासी लोगों, किसानों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले जन-संगठनों के मंच ने एक बयान में कहा, ‘‘यह सब भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए)’, पेसा, पांचवीं और छठी अनुसूचियों, सामाजिक प्रभाव आकलन के प्रावधानों और ग्राम सभा की सहमति जैसे कानूनी सुरक्षा उपायों के बावजूद हो रहा है।’’

इसने यह भी कहा कि इन सुरक्षा उपायों को कमज़ोर किया जा रहा है, इनसे बचा जा रहा है या इन्हें केवल दिखावटी प्रक्रियाओं तक सीमित किया जा रहा है।

संगठन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राजमार्ग, हवाई अड्डे, फ्रेट कॉरिडोर, खनन, औद्योगिक कॉरिडोर, रियल एस्टेट और दूसरे कामों के लिए ज़मीन खाली कराई जा रही है, जिससे कॉर्पोरेट जगत के लिए संपत्ति जमा करना आसान हो रहा है।

इसने यह भी कहा कि एफआरए को कमज़ोर करना चिंता की बात है।

संगठन के अनुसार, मई 2025 तक एफआरए के तहत दायर किए गए लगभग 51 लाख दावों में से सिर्फ़ 25 लाख दावों को ही मंज़ूरी मिली थी।

इसने कहा कि करीब 18.6 लाख दावे खारिज कर दिए गए और 7.5 लाख दावे लंबित रह गए।

भूमि अधिकार आंदोलन ने कई मांगें रखी हैं, जिनमें ज़बरन बेदखली, बुलडोज़र से तोड़-फोड़ और जबरन ज़मीन अधिग्रहण को तुरंत रोकना शामिल है।

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव