आयकर विभाग के अभियान के तहत 1.25 करोड़ अद्यतन आईटीआर दाखिल; 9494 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर संग्रह
आयकर विभाग के अभियान के तहत 1.25 करोड़ अद्यतन आईटीआर दाखिल; 9494 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर संग्रह
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि आयकर विभाग के एक अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में 1.25 करोड़ करदाताओं ने संशोधित या अद्यतन आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए, जिससे 9,494 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर संग्रह हुआ।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कर संग्रह दक्षता बढ़ाने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यवहार संबंधी आकलन और डिजिटल संचार मंचों का उपयोग करते हुए ‘नज’ (नॉन इंट्रूसीव यूजेज ऑफ डेटा टू गाइड एंड इनेबल) अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के करदाताओं को सही जानकारी देने और कानून के अनुपालन के लिए प्रेरित करना है।
अभियान के तहत जोखिम विश्लेषण के आधार पर चुने गए करदाताओं को उनके दाखिल किये गए आयकर रिटर्न की समीक्षा कर उसे संशोधित या अद्यतन करने के लिए संदेश भेजे जाते हैं। इन करदाताओं की पहचान गहन विश्लेषण के माध्यम से की जाती है, जिसमें आय या परिसंपत्तियों की गलत या अधूरी जानकारी, या कटौती एवं (आयकर) छूट के गलत दावों का पता लगाया जाता है।
चौधरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान इस अभियान के परिणामस्वरूप 1.25 करोड़ संशोधित या अद्यतन आईटीआर दाखिल किए गए और 9,494 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर संग्रह हुआ।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आयकर विभाग ने गलत तरीके से कर राहत लेने और फर्जी आयकर कटौती के दावों के कई मामलों का पता लगाया है।
मंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों का खुलासा डेटा विश्लेषण और सत्यापन अभियानों के माध्यम से हुआ। बाद में संबंधित संस्थानों, पेशेवर मध्यस्थों और ऐसे अन्य लोगों के खिलाफ तलाशी एवं सर्वेक्षण की कार्रवाई की गई, जिन पर इस तरह के दावों को बढ़ावा देने का संदेह था। इन कार्रवाई में कर चोरी और आयकर अधिनियम के अन्य उल्लंघन से जुड़े साक्ष्य भी मिले।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने इसमें शामिल संस्थानों, मध्यस्थों और लाभार्थियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है, चौधरी ने कहा कि जांच और डेटा विश्लेषण के जरिए आयकर विभाग ने फर्जी दावों को बढ़ावा देने वाले विभिन्न वर्गों की पहचान की है। इनमें आयकर रिटर्न तैयार करने वाले पेशेवर और चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में ‘नज’ अभियान चलाने, ई-सत्यापन, तलाशी एवं जब्ती, सर्वेक्षण, निर्धारण और पुनर्निर्धारण, जुर्माना तथा अभियोजन जैसी कार्रवाई की गई है।
चौधरी ने कहा कि इसके अलावा संबंधित सीए के खिलाफ उपयुक्त जानकारी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) सहित संबंधित विनियामक और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भी साझा की गई है।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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