केरल: उच्च न्यायालय ने ईडी अधिकारियों पर हमले के मामले में नौ आरोपियों को जमानत दी
केरल: उच्च न्यायालय ने ईडी अधिकारियों पर हमले के मामले में नौ आरोपियों को जमानत दी
कोच्चि, तीन अगस्त (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर मई में हुई छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले के आरोप में गिरफ्तार नौ लोगों को सोमवार को नियमित जमानत दे दी।
ईडी ने अदालत में दावा किया था कि यह हमला अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि ‘‘समन्वित और सुनियोजित हमला’’ था, जिसके बावजूद न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने आरोपियों को राहत प्रदान की।
अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि मामले की केस डायरी को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया यह उनके द्वारा किए गए पूर्व नियोजित आपराधिक कृत्य की ओर संकेत करता है।
न्यायमूर्ति एडप्पागथ ने कहा, ‘‘भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने सही दलील दी कि यह ऐसा मामला है, जिसमें ईडी अधिकारी अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान हमले का शिकार हुए। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और बरामदगी भी कर ली गई है।’’
न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘किसी भी याचिकाकर्ता का गंभीर अपराधों से जुड़ा कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। पीड़ितों को भी कोई गंभीर चोट नहीं आई है। इन कारणों से मुझे यह मानने का कोई आधार नहीं मिलता कि किसी उद्देश्य से याचिकाकर्ताओं को आगे भी हिरासत में रखना जरूरी है। इसलिए वे जमानत पर रिहा किए जाने के हकदार हैं।’’
अदालत ने कहा कि हमले में ईडी अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहनों को हुए नुकसान का आकलन 2.2 लाख रुपये किया गया है इसलिए जमानत देने की शर्त के रूप में आरोपियों को नुकसान की भरपाई के लिए यह राशि जमा करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि नौ आरोपियों को इस शर्त पर जमानत पर रिहा किया जाए कि उनमें से प्रत्येक एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदार पेश करे।
अदालत ने कहा, “इसके अलावा जमानत की अन्य शर्तों में जांच में पूरा सहयोग करना, प्रत्येक शनिवार पूर्वाह्न 10 बजे से 11 बजे के बीच और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना, तिरुवनंतपुरम के कैंट थाने की सीमा में प्रवेश नहीं करना और संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में प्रत्येक आरोपी द्वारा 10 हजार रुपये जमा करना शामिल है।”
केंद्रीय एजेंसी ने दलील दी कि 27 मई को उसके अधिकारियों पर हुए हमले को एक साधारण कानून-व्यवस्था की घटना या अनायास घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह कई घंटों तक चली छापेमारी के समाप्त होने के बाद हुआ था।
ईडी की यह छापेमारी विजयन की बेटी की कंपनी और रेत खनन कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूचाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ी थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विजयन की बेटी टी. वीणा और उनकी फर्म ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2017 से 2020 के बीच रेत खनन कंपनी सीएमआरएल से आईटी और परामर्श सेवाओं के एवज में रकम मिली थी जबकि ये सेवाएं कथित तौर पर कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं।
हालांकि, वीणा और सीएमआरएल ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और उनका कहना है कि यह भुगतान एक वैध व्यावसायिक समझौते का हिस्सा था।
छापेमारी के बाद जब ईडी अधिकारी वापस लौट रहे थे तभी भीड़ ने उनके वाहनों पर हमला कर दिया जिसमें एक चालक, सीआरपीएफ के एक अधिकारी और तलाशी दल का एक सदस्य कथित तौर पर घायल हो गए थे।
आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अधिवक्ता जयशंकर वी. नायर के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में ईडी ने दावा किया कि ‘‘आरोपों से स्पष्ट होता है कि धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत प्रदत्त वैधानिक अधिकारों के अनुरूप विधिसम्मत तलाशी कार्रवाई कर रहे केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर सुनियोजित और संगठित हमला किया गया।’’
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि यह एक ‘‘हिंसक, पूर्व-नियोजित और राजनीतिक रूप से समन्वित हमला’’ था, जिसमें खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत

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