‘सोन चिड़िया’ के संरक्षण के लिए दक्कन में 16 अहम क्षेत्रों की पहचान की गई

‘सोन चिड़िया’ के संरक्षण के लिए दक्कन में 16 अहम क्षेत्रों की पहचान की गई

‘सोन चिड़िया’ के संरक्षण के लिए दक्कन में 16 अहम क्षेत्रों की पहचान की गई
Modified Date: September 2, 2026 / 04:50 pm IST
Published Date: September 2, 2026 4:50 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) देश के दक्कन क्षेत्र में गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘सोन चिड़िया’ के संरक्षण के लिए 16 अहम क्षेत्रों की पहचान की गई है।

सोन चिड़िया को ‘गोडावण’ और ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ जैसे नामों से भी जाना जाता है।

लगभग 18,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले ये स्थान 35 जिलों में विभाजित हैं। इनमें महाराष्ट्र के 22, कर्नाटक और तेलंगाना में छह-छह तथा आंध्र प्रदेश का एक जिला शामिल है। इन स्थानों को ‘पीएलओएस वन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में चिह्नित किया गया है।

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि दक्कन का इलाका भारत का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है, जहां देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी कम बारिश होती है और यही वजह है कि यह सोन चिड़िया के लिए उपयुक्त है।

उन्होंने कहा कि अध्ययन से मिली जानकारी से यह समझने में मदद मिलेगी कि इस इलाके में सोन चिड़िया के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए 16 में से हर स्थल पर किस तरह की कोशिशों और प्रबंधन संबंधी कदमों की जरूरत है।

यह पक्षी प्रजाति दुनिया की सबसे भारी उड़ने वाली प्रजातियों में से एक है और एक पक्षी का वजन 15 किलोग्राम तक हो सकता है।

टीम ने बताया कि ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ (आईयूसीएन) की रेडलिस्ट के अनुसार, सोन चिड़िया गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है। यह पक्षी कभी पूरे भारत और दक्षिणी पाकिस्तान में पाया जाता था, लेकिन अब इनकी संख्या केवल 100-150 ही बची है।

अध्ययन रिपोर्ट के लेखकों ने लिखा, ‘‘हमने दक्कन क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में संरक्षण के लिए 16 आवश्यक स्थानों की पहचान की है।’’

उन्होंने कहा कि इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास और पारंपरिक खेती के तरीकों को फिर से बहाल करने की सलाह दी जाती है।

भाषा नेत्रपाल देवेंद्र

देवेंद्र


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