नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि जैव-चिकित्सीय कचरे के निपटान से जुड़े कुछ नियमों का पालन नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हरित अधिकरण उपचार सुविधाओं द्वारा जैव-चिकित्सीय कचरे के रखरखाव, उपचार और निपटान में नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने पांच अगस्त के जारी आदेश में कहा कि सीपीसीबी ने पांच अगस्त की तारीख वाली एक रिपोर्ट दाखिल की।
रिपोर्ट में देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जैव-चिकित्सीय कचरे को ‘गहराई में गाड़ने’ की प्रक्रिया अपनाए जाने का उल्लेख किया गया है।
अधिकरण ने पाया कि गहराई में गाड़ने की प्रक्रिया अपनाने वाली 9,178 स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में से केवल 5,715 निर्धारित मानकों का पालन कर रही थीं।
एनजीटी ने पाया कि सबसे अधिक उल्लंघन भूजल स्तर को गड्ढे से कम से कम छह मीटर नीचे बनाए रखने के नियम का था।
एनजीटी के मुताबिक, कुल 477 स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं इस मानक का पालन नहीं कर रही थीं। इसके अलावा, 341 स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमति लिए बिना संचालित हो रही थीं।
अधिकरण ने कहा कि रिपोर्ट में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विभिन्न मानकों के अनुपालन में गंभीर कमियां सामने आई हैं।
अधिकरण ने कहा, ‘‘सीपीसीबी की ओर से पेश वकील ने बताया कि फिलहाल नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (पीसीबी) तथा प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) को सूचनाएं भेजी गई हैं। अगर आठ सप्ताह के भीतर नियमों का पालन नहीं किया गया तो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा पांच के तहत निर्देश जारी किए जाएंगे।’’
इस प्रावधान के तहत केंद्र को बाध्यकारी निर्देश जारी करने के अधिकार दिए गए हैं।
इनमें औद्योगिक गतिविधियों को नियंत्रित करना या उन्हें बंद कराना तथा बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति रोकना शामिल है।
अधिकरण ने अपने आदेश में सीपीसीबी को निर्देश दिया कि वह 28 अक्टूबर, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे।
भाषा जितेंद्र नरेश
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