प्रस्तावित परिसीमन तमिलनाडु के राजनीतिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व के लिए खतरा: कांग्रेस

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प्रस्तावित परिसीमन तमिलनाडु के राजनीतिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व के लिए खतरा: कांग्रेस

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  • Publish Date - August 9, 2026 / 06:38 PM IST,
    Updated On - August 9, 2026 / 06:38 PM IST

चेन्नई, नौ अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का रविवार को कड़ा विरोध करते हुए इसे दक्षिणी राज्यों की आवाज के लिए सीधा खतरा करार दिया।

पार्टी ने आगाह किया कि प्रस्तावित परिसीमन के कारण तमिलनाडु के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर और पार्टी सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने चेन्नई में आयोजित रैली में दावा किया कि प्रस्तावित परिसीमन से संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज दब जाएगी।

टैगोर ने कहा कि सीटों की संख्या में 50 फीसदी की एक समान वृद्धि से तमिलनाडु (पुडुचेरी सहित) का प्रतिनिधित्व 40 सीट से बढ़कर 60 हो जाएगा, जबकि उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 सीट से बढ़कर 120 हो जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर 40 सीट से बढ़कर 60 का हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “हमारा रुख साफ है : न तो परिसीमन हो और न ही सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।”

टैगोर ने मौजूदा व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की वकालत की।

उन्होंने केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन करने या उसे आगे बढ़ाने वाले नेताओं को “आज के दौर के एट्टाप्पन (गद्दार)” करार दिया, जो राज्य के राजनीतिक अधिकार से समझौता कर रहे हैं।

इस बीच, परिसीमन पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के रुख और राज्य सरकार की हालिया बैठक में पार्टी की अनुपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर द्रमुक नेता कनिमोई सोमू ने संबंधित बैठक को “सिर्फ नाम के लिए बुलाई गई” बैठक बताकर खारिज कर दिया।

कनिमोई ने कहा कि मौजूदा सरकार के पास प्रशासनिक अनुभव और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की कमी है।

उन्होंने कहा कि एमके स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक ने राष्ट्रीय स्तर पर संसदीय सीटों में तमिलनाडु की उचित हिस्सेदारी के लिए लगातार लड़ाई लड़ी है।

भाजपा के प्रति द्रमुक के रुख को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए कनिमोई ने कहा कि राजनीति में “किसी को भी दोस्त या दुश्मन नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने साफ किया कि द्रमुक सिर्फ उसी बात का समर्थन करेगी, जो तमिलनाडु के हित में हो।

भाषा पारुल नरेश

नरेश