विभिन्न देशों से पांच साल में 615 प्राचीन वस्तुएं वापस लाई गईं : शेखावत
विभिन्न देशों से पांच साल में 615 प्राचीन वस्तुएं वापस लाई गईं : शेखावत
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि 2021 से इस साल 30 जून तक विभिन्न देशों से कुल 615 पुरावस्तुएं भारत वापस लाई गईं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उनसे पिछले पांच वर्षों के दौरान चोरी हुई पुरावस्तुओं और सांस्कृतिक वस्तुओं की वर्षवार संख्या, पता लगाई गई वस्तुओं का विवरण तथा उन्हें वापस लाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विवरण मांगा गया था।
मंत्री ने अपने जवाब में केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों से चोरी की घटनाओं का विवरण तालिका के रूप में साझा किया।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के बिक्कवोलु स्थित गोलिंगेश्वर मंदिर समूह से नंदी की एक मूर्ति चोरी हुई थी, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया।
वहीं, 2022 में कर्नाटक के मांड्या जिले के मारेहल्ली स्थित लक्ष्मीनरसिंह मंदिर के गणपति अम्मा मंदिर से गणपति की पत्थर की मूर्ति चोरी हुई थी। उसी वर्ष बिहार के पटना जिले के एक गांव से भगवान विष्णु की एक प्रतिमा भी चोरी हुई थी। आंकड़ों के अनुसार, दोनों पुरावस्तुएं अब तक बरामद नहीं की जा सकी हैं।
शेखावत से उन देशों के नाम बताने का भी अनुरोध किया गया था, जहां से पिछले पांच वर्षों के दौरान पुरावस्तुएं और सांस्कृतिक संपत्तियां वापस लाई गईं। साथ ही, चोरी हुई पुरावस्तुओं की पहचान और बरामदगी को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और तय लक्ष्यों की जानकारी भी मांगी गई थी।
सरकार द्वारा साझा किये गए अन्य आंकड़ों के अनुसार, 2021 में अमेरिका से 157, जबकि कनाडा और ब्रिटेन से एक-एक पुरावस्तु भारत वापस लाई गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार पुरावस्तुओं की चोरी रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थलों और संग्रहालयों में नियमित निगरानी कर्मियों के अलावा जरूरत के अनुसार निजी सुरक्षा गार्ड और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तैनाती की गई है।
उन्होंने बताया कि जब भी किसी पुरावस्तु की चोरी की सूचना मिलती है, तो प्राथमिकी दर्ज की जाती है और चोरी हुई वस्तु का पता लगाने तथा उसे देश से बाहर भेजे जाने को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सीमा शुल्क निकासी केंद्रों को ‘लुकआउट नोटिस’ जारी किया जाता है।
शेखावत ने बताया कि 2014 से 30 जून 2026 तक कुल 655 पुरावस्तुएं वापस लाई गई हैं और उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि संस्कृति मंत्रालय ने ‘रचनात्मक भारत’ नाम की एक पहल की है, जिसका मकसद देश की सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रणनीति का मकसद रचनात्मक अर्थव्यवस्था के टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए क्षमता निर्माण, बाजार तक पहुंच, नवाचार, डिजिटल सुविधाएं और संस्थागत मजबूती जैसे उपाय किए जाएंगे। साथ ही उभरते कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी मदद दी जाएगी।
इस प्रस्तावित योजना में मुख्य रूप से दृश्य कला, प्रदर्शन कला, संग्रहालय, सांस्कृतिक विरासत, वास्तुशिल्प, डिजिटल रचनात्मक उद्योग और अन्य रचनात्मक क्षेत्र शामिल हैं।
मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पुरातत्व संबंधी परियोजनाओं के लिए 121 बार अनुमति दी गई।
शेखावत ने कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों में किसी भी पुरातात्विक परियोजना को जारी रखने या बंद करने के संबंध में कोई अदालती आदेश नहीं आया है।’’
उन्होंने यह भी बताया कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2014 के 1.31 करोड़ से बढ़कर 2024 में 2.06 करोड़ हो गई। इस तरह, इसमें 56.93 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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