प. बंगाल की मतदाता सूची से 79 लाख ‘फर्जी’ नाम हटाए गए; भाजपा 177 से अधिक सीट जीतेगी: शुभेंदु
प. बंगाल की मतदाता सूची से 79 लाख 'फर्जी' नाम हटाए गए; भाजपा 177 से अधिक सीट जीतेगी: शुभेंदु
कोलकाता, 25 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राज्य की मतदाता सूची से लगभग 79 लाख ‘फर्जी’ नाम हटा दिए गए हैं और इस बात पर जोर दिया कि इससे भाजपा को अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में 177 से अधिक सीट हासिल करने में मदद मिलेगी।
शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मेदिनीपुर जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सत्ता में बने रहने के लिए हमेशा फर्जी मतदाताओं पर निर्भर रही है और जारी पुनरीक्षण प्रक्रिया ऐसे नामों को हटाने के लिए शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा को चुनाव जीतने में मदद मिलेगी।
भाजपा नेता अधिकारी ने हटाए गए नामों का वर्णन करने के लिए कई उपमाओं का प्रयोग करते हुए कहा, ‘नाश्ते के समय 58 लाख नाम हटाए गए, दोपहर के भोजन के समय सात लाख नाम हटाए गए और शाम की चाय के दौरान 14 लाख और नाम हटा दिए गए। रात का खाना अभी परोसा जाना बाकी है।’
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का परोक्ष तौर पर इशारा एसआईआर कवायद के गणना चरण के बाद हटाए गए 58 लाख नाम और 28 फरवरी को सूचियों के अंतिम प्रकाशन के दौरान कथित तौर पर हटाए गए अतिरिक्त सात लाख नामों की ओर था।
अधिकारी ने दावा किया कि सोमवार को प्रकाशित पहली पूरक मतदाता सूची में जिन 32 लाख मतदाताओं की पड़ताल की गई थी, उनमें से 14 लाख नाम हटा दिए गए थे।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने अभी तक पूरक सूची में जांचे गए मतदाताओं की कुल संख्या या हटाए गए नामों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
उन्होंने कहा, ‘‘मतदाता सूची से अब तक 79 लाख नाम हटाए जा चुके हैं।’’ उन्होंने दावा किया कि ‘‘इन फर्जी मतदाताओं में से 90 प्रतिशत तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में वोट डालते थे।’’
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुनरीक्षण प्रक्रिया का विरोध कर रही थीं और इसे रोकने के लिए उन्होंने भारत के उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
उन्होंने कहा कि एसआईआर कवायद पहले भी कई बार की जा चुकी है, लेकिन इस बार सत्ताधारी पार्टी ने इसका विरोध किया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बांग्लादेश से आए ‘‘अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक रहे हैं।’’
अधिकारी ने राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि ‘‘पश्चिम बंगाल में हिंदू आबादी 1951 की जनगणना में 85 प्रतिशत से घटकर आज 65 प्रतिशत से भी कम हो गई है।’’
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पार्टी की बढ़त उल्लेखनीय रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2016 में भाजपा की तीन सीट थीं, जो 2021 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 77 हो गईं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस बार कम से कम 177 सीट होंगी; चार मई की दोपहर (जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे) तक यह आंकड़ा कहां तक पहुंचता है, यह हम देखेंगे।’
अधिकारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक रणनीति भी बताई और उनसे आग्रह किया कि वे अद्यतन मतदाता सूची का अध्ययन करें। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि रोजगार के लिए राज्य छोड़कर गए प्रवासी श्रमिक मतदान की अंतिम तिथि से पहले अपना वोट डालने के लिए वापस लौट आएं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन्हें मुस्लिम बूथ में 100 में से 99 वोट मिलते हैं, तो हमें सनातनी बूथ में 100 में से 100 वोट क्यों नहीं मिलने चाहिए?’’
इस चुनाव को एक ‘राष्ट्रवादी और सनातनी सरकार’ की स्थापना की लड़ाई बताते हुए अधिकारी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तहत भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना लागू करेगी, महिलाओं को 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी और योग्यता के आधार पर छह लाख सरकारी नौकरियां सृजित करेगी।
उन्होंने मतदाताओं से राम नवमी के दिन राज्य में ‘परिवर्तन’ लाने की शपथ लेने का आग्रह भी किया।
भाषा अमित रंजन
रंजन

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