‘स्कूल ट्रिप’ पर आईआईटी मद्रास नहीं जा सके 90 प्रतिशत दिव्यांगता वाले छात्र को मिला दाखिला
‘स्कूल ट्रिप’ पर आईआईटी मद्रास नहीं जा सके 90 प्रतिशत दिव्यांगता वाले छात्र को मिला दाखिला
नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) जन्म से ही रीढ़ की हड्डी से जुड़ी 90 शारीरिक अक्षमता से पीड़ित 17 वर्षीय जे. संतोष 2025 में स्कूल के अपने सहपाठियों के साथ आईआईटी मद्रास की शैक्षणिक यात्रा पर नहीं जा सके थे, लेकिन एक साल बाद ही उन्होंने देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में शामिल आईआईटी मद्रास के ‘डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस’ के चार वर्षीय बीएस डिग्री कार्यक्रम में दाखिला हासिल कर एक अहम मुकाम हासिल कर लिया।
आईआईटी मद्रास में पढ़ाई करने के संतोष के सपने की शुरूआत उस वक्त हुई, जब उनके सहपाठी संस्थान की शैक्षणिक यात्रा से लौटे। उन्होंने परिसर और वहां के अनुभवों के बारे में जो बातें बताईं, उनसे संतोष में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में पढ़ाई करने की रूचि जगी।
शुरुआत में उन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) की तैयारी करने की योजना बनाई थी, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण उनके लिए यह रास्ता मुश्किल था। इसके बजाय उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और अंततः अपने स्कूल में 12वीं कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया।
अमेरिका के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक’ के अनुसार, ‘‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’’ आनुवंशिक बीमारियों का एक समूह है, जिसमें ‘मोटर न्यूरॉन’ नष्ट होने लगते हैं और धीरे-धीरे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है तथा उनका क्षय होने लगता है।
संतोष ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मैंने इस पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और आईआईटी मद्रास में सामाजिक पहल एवं संपर्क के प्रमुख हरि कृष्णन के एक प्रेरणादायक वीडियो के माध्यम से ‘आईआईटीएम फॉर ऑल’ पहल के बारे में पता चला। इस वीडियो ने मुझे इस पाठ्यक्रम के बारे में और जानने तथा ऐसे अवसर पर विचार करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बारे में मुझे पहले जानकारी नहीं थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने तमिलनाडु वॉलंटियर्स से संपर्क किया। इस गैर सरकारी संगठन ने आवेदन प्रक्रिया में मेरी मदद की। हरि कृष्णन सर भी मेरे घर आए, उन्होंने मार्गदर्शन किया और आवेदन से जुड़ी समस्या को दूर करने में मदद की। इसके बाद स्वयंसेवियों ने पात्रता परीक्षा की तैयारी में भी मेरी सहायता की।’’
पात्रता परीक्षा में शामिल होने के बाद संतोष ने दूसरे प्रयास में इसे उत्तीर्ण कर लिया और आईआईटी मद्रास के पाठ्यक्रम में अपनी सीट सुनिश्चित कर ली।
आईआईटी मद्रास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सपने हमेशा आसान रास्ते पर नहीं चलते, लेकिन दृढ़ संकल्प आपको उस मुकाम तक पहुंचा सकता है, जहां आप पहुंचना चाहते हैं। जन्म से रीढ़ की हड्डी से जुड़ी शारीरिक अक्षमता और ‘सेरेब्रल पाल्सी’ से पीड़ित जे. संतोष ने आईआईटी मद्रास के डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस के चार वर्षीय बीएस कार्यक्रम में दाखिला हासिल किया है।’’
संस्थान ने कहा, ‘‘ऑटो रिक्शा चालक के बेटे संतोष को इस कार्यक्रम के बारे में गैर सरकारी संगठन तमिलनाडु वॉलंटियर्स के माध्यम से पता चला और उन्होंने ऐसा पाठ्यक्रम चुना, जिसे काफी हद तक घर से पूरा किया जा सकता है।’’
भाषा सुभाष रंजन
रंजन

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