‘पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’: चिदंबरम ने सीबीआई को और अधिकार देने का विरोध किया

‘पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’: चिदंबरम ने सीबीआई को और अधिकार देने का विरोध किया

‘पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’: चिदंबरम ने सीबीआई को और अधिकार देने का विरोध किया
Modified Date: September 5, 2026 / 12:56 am IST
Published Date: September 5, 2026 12:56 am IST

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को खारिज करते हुए पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि ‘‘कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन जाता है’’, क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है।

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद द्वारा लिखित पुस्तक ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में चिदंबरम ने यह टिप्पणी की। इस परिचर्चा में पुलिस सुधारों और वर्दीधारी कर्मियों द्वारा की जाने वाली कथित ज्यादतियों पर चर्चा हुई।

चिदंबरम ने सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को खारिज किया। हालांकि, उन्होंने आंतरिक सुधारों की आवश्यकता से सहमति जताई।

पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में थाना प्रभारी (एसएचओ) से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक एक पूरी पदानुक्रम व्यवस्था होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘सीबीआई में बेहतरीन अधिकारी काम करते हैं, जिनमें से ज्यादातर राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। वह राज्य में एक अच्छे अधिकारी होते हैं।’’

चिदंबरम ने कहा, ‘‘वह केंद्र में आकर खराब अधिकारी क्यों बन जाते हैं? क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है। पिंजरे में बंद तोता भी कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।’’

भाषा शफीक रंजन

रंजन


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