उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय पीठ धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव संबंधी याचिकाओं पर सात अप्रैल को सुनवाई करेगी

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उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय पीठ धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव संबंधी याचिकाओं पर सात अप्रैल को सुनवाई करेगी

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 11:26 PM IST,
    Updated On - April 4, 2026 / 11:26 PM IST

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ केरल के शबरिमला मंदिर समेत विभिन्न धर्मों में और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई सात अप्रैल से शुरू करेगी।

उच्चतम न्यायालय की 7 अप्रैल की वाद सूची के अनुसार नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल होंगे।

सितंबर 2018 में, पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए उस प्रतिबंध को हटा दिया था, जो 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को केरल के शबरिमला स्थित अय्यप्पा मंदिर में प्रवेश करने से रोकता था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सदियों पुरानी यह हिंदू धार्मिक प्रथा अवैध और असंवैधानिक है।

बाद में 14 नवंबर 2019 को, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक अन्य पांच-सदस्यीय पीठ ने 3:2 के बहुमत से, विभिन्न उपासना स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे को एक वृहद पीठ के पास भेज दिया था।

उस समय पीठ ने विभिन्न धर्मों की स्वतंत्रता से संबंधित व्यापक मुद्दे निर्धारित करते हुए कहा था कि विशिष्ट मामले के तथ्यों के बिना इन पर निर्णय नहीं लिया जा सकता।

शबरिमला मामले के अलावा, फैसले में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों और दरगाहों में प्रवेश और गैर-पारसी पुरुषों से विवाहित पारसी महिलाओं को अज्ञारी के पवित्र अग्निस्थल में प्रवेश से प्रतिबंधित किए जाने के मुद्दों को भी वृहद पीठ के समक्ष संदर्भित किया गया था।

एक अन्य पीठ ने 11 मई 2020 को फैसला सुनाया था कि शबरिमला मंदिर प्रवेश मामले में समीक्षा क्षेत्राधिकार के तहत अपनी सीमित शक्ति का प्रयोग करते हुए, उसकी पांच-सदस्यीय पीठ के पास विधि संबंधी प्रश्नों को निर्णय के लिए एक बड़ी पीठ को भेजने का अधिकार है।

उच्चतम न्यायालय ने 16 फरवरी को कहा था कि वह इस मामले में अंतिम सुनवाई सात अप्रैल से शुरू करेगा और उसे 22 अप्रैल तक पूरा करेगा।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि उन्होंने शबरिमला से संबंधित उस फैसले पर पुनर्विचार के अनुरोध का समर्थन किया है, जिसमें केरल के इस पर्वतीय मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

भाषा

देवेंद्र प्रशांत

प्रशांत