अहमदाबाद, चार अप्रैल (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार के निर्णय लेने, न्यायिक दलील के लिए, आदेश तैयार करने या निर्णय की तैयारी, जमानत संबंधी सजा पर विचार करने या किसी भी महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर रोक लगा दी है।
गुजरात में शनिवार को जिला न्यायिक अधिकारियों के एक सम्मेलन में उच्च न्यायालय की एआई नीति के प्रस्तुत की गई, जिसके मुताबिक एआई का उपयोग न्यायिक तर्क के प्रतिस्थापन के रूप में नहीं, बल्कि न्याय वितरण की गति और गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाना चाहिए।
नीति के अनुसार, इन प्रौद्योगिकियों में मतिभ्रम, पूर्वाग्रह, गोपनीयता का उल्लंघन और न्यायिक स्वतंत्रता का क्षरण जैसे जोखिम शामिल हैं और इनका सावधानीपूर्वक और संस्थागत अनुशासन के साथ प्रबंधन किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत नीति में कहा गया है कि एआई को सिर्फ बहुत ही सीमित कामों तक ही इस्तेमाल किया जाए—जैसे कि पूरी तरह से पहचान संबंधी जानकारी या विवरण हटाने में, केस आवंटन में मदद करना और कानून के सिद्धांतों पर शोध करना—तो न्याय देने में इंसानों की अहमियत बनी रहती है। साथ ही, इसका उपयोग सिर्फ प्रशासनिक कामों में मदद करने के लिए किया जाता है, ताकि कोई देरी न हो और लोगों को समय पर न्याय मिलने में देरी न हो।
नीति दस्तावेज के मुताबिक, ‘‘व्यापक रूप से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग – प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से – न्यायिक निर्णय, अधिनिर्णयन, दलील, कानून के अनुप्रयोग, तथ्यों की व्याख्या, तर्कों के मूल्यांकन, अधिकारों/देयताओं के निर्धारण, सजा, जमानत, अंतरिम आदेश या अंतिम निर्णय के किसी भी पहलू के लिए नहीं किया जाएगा।’’
नीति दस्तावेज के मुताबिक एआई का उपयोग किसी भी निर्णय, अंतिम आदेश या बाध्यकारी कानूनी फैसले को लिखने, उत्पन्न करने या उसका सार तैयार करने के लिए नहीं किया जा सकता है, भले ही बाद में किसी न्यायाधीश द्वारा उसकी समीक्षा की जाए।
दस्तावेज में कहा गया है कि इसमें पक्षों, गवाहों या अधिवक्ताओं के नाम, पते या पहचान संबंधी जानकारी, लंबित कार्यवाही या अप्रकाशित आदेशों का विवरण, विशेषाधिकार प्राप्त संचार या गोपनीय कानूनी रणनीतियों और संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा दर्ज नहीं किया जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि एआई का उपयोग किसी भी रूप में साक्ष्य उत्पन्न करने, गढ़ने, परिष्कृत करने या बदलने के लिए नहीं किया जाएगा। एआई द्वारा उत्पन्न उद्धरणों, केस संदर्भों या वैधानिक प्रावधानों का उपयोग आधिकारिक प्राथमिक स्रोतों से स्वतंत्र सत्यापन के बिना करना भी निषिद्ध है, साथ ही किसी भी कार्यालय नोट या प्रस्तुति का मसौदा तैयार करना, उसमें सुधार करना या उसका सारांश बनाना भी प्रतिबंधित है।
दस्तावेज में कहा गया कि न्यायाधीश अपने नाम से जारी किए गए प्रत्येक आदेश, निर्णय और टिप्पणी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होता है, और इसे किसी भी एआई उपकरण के उपयोग से सौंपा, साझा या कम नहीं किया जा सकता है।
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धीरज प्रशांत
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