जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है वह नैतिक दिशा से भी भटक जाता हैः हरिवंश

जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है वह नैतिक दिशा से भी भटक जाता हैः हरिवंश

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  • Publish Date - January 17, 2026 / 09:19 PM IST,
    Updated On - January 17, 2026 / 09:19 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने शनिवार को भारत मंडपम में विश्व पुस्तक मेले में एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है वह नैतिक दिशा से भी भटक जाता है।

यह संगोष्ठी ‘श्री वीर विठ्ठल भाई की गौरव गाथा: एक शताब्दी यात्रा’ नाम के पुस्तक के विमोचन के अवसर आयोजित की गई। इसका आयोजन दिल्ली विधानसभा द्वारा किया गया था।

सिंह ने इस कार्यक्रम में कहा, “जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, वह न केवल अपना भविष्य खो देता है बल्कि अपनी नैतिक दिशा से भी भटक जाता है। इतिहास केवल अतीत का अभिलेख नहीं है, यह वह आधारशिला है जिस पर लोकतांत्रिक संस्थाएं, जन चेतना और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण होता है।”

सिंह ने अपने संबोधन में दिल्ली विधानसभा सचिवालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने ‘गहन शोध और दस्तावेजीकरण पर आधारित प्रकाशन के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लगभग भुला दिए गए अध्याय को पुनर्जीवित किया है’। उपसभापति ने रॉलेट अधिनियम काल को याद करते हुए बताया कि वीर विट्ठलभाई पटेल ने विधान परिषद में 220 से अधिक संशोधन प्रस्तुत किए और परिषद के पहले भारतीय अध्यक्ष बने।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 1912 से 1933 तक का काल भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे निर्णायक चरण था, जिसका समापन 22 अक्टूबर, 1933 को वीर विट्ठलभाई पटेल के निधन के साथ हुआ।

गुप्ता ने कहा, “पटेल एक क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी और विधायी नेता थे, जिन्होंने भारतीय संसदीय लोकतंत्र की संस्थागत नींव रखी।”

उन्होंने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल व सुभाष चंद्र बोस जैसे राष्ट्रीय नेताओं का मार्गदर्शन किया और आने वाले वर्षों में उन्हें भारत की स्वतंत्रता के सूत्रधारों में से एक के रूप में पहचाना जाएगा।

इस संगोष्ठी में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष गुप्ता के साथ-साथ शिक्षाविद, इतिहासकार, छात्र और अन्य लोग भी उपस्थित थे।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश