कचारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने संबंधी प्रस्तावित बैठक का आपसू ने विरोध किया

कचारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने संबंधी प्रस्तावित बैठक का आपसू ने विरोध किया

कचारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने संबंधी प्रस्तावित बैठक का आपसू ने विरोध किया
Modified Date: July 11, 2026 / 02:44 pm IST
Published Date: July 11, 2026 2:44 pm IST

ईटानगर, 11 जुलाई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के शीर्ष छात्र संगठन ने राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें जनगणना के दौरान नामसाई और चांगलांग ज़िलों के कचारी समुदाय को ‘अनुसूचित जनजाति’, ‘उप-जनजाति’ और ‘मैदानी जनजाति’ की श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई है।

‘ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन’ (आपसू) ने चेतावनी दी है कि यदि यह बैठक आयोजित की गई तो वह अपना आंदोलन तेज करेगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा जनजातीय मामलों के विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी एक परिपत्र के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में यह बैठक 13 जुलाई को होगी।

बैठक में भाग लेने के लिए अखिल अरुणाचल प्रदेश कचारी सामुदायिक विकास परिषद, सोनोवाल कचारी जातीय परिषद और आपसू के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

आपसू के अध्यक्ष मेजे ताकू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश पूर्णतः जनजातीय राज्य है और यहां के मूल निवासियों की भूमि, संसाधनों तथा राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन, 1873 के तहत इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था लागू है।

उन्होंने कहा, ‘‘जो समुदाय राज्य के मूल निवासी नहीं हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने से ये संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपाय कमजोर हो जाएंगे।’’

ताकू ने कहा कि इस मुद्दे पर आपसू का रुख स्पष्ट और अडिग है।

आपसू ने चेतावनी दी कि इस दिशा में उठाया गया कोई भी कदम राज्य में शांति और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। संगठन ने कहा कि प्रस्तावित बैठक के किसी भी परिणाम के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।

भाषा प्रचेता नेत्रपाल

नेत्रपाल


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