मणिपुर में असम राइफल्स के दो जवानों की हत्या के बाद तलाशी अभियान जारी

मणिपुर में असम राइफल्स के दो जवानों की हत्या के बाद तलाशी अभियान जारी

मणिपुर में असम राइफल्स के दो जवानों की हत्या के बाद तलाशी अभियान जारी
Modified Date: July 11, 2026 / 02:42 pm IST
Published Date: July 11, 2026 2:42 pm IST

इंफाल, 11 जुलाई (भाषा) मणिपुर में इस सप्ताह असम राइफल्स के दो जवानों की हत्या में शामिल लोगों की धरपकड़ के लिए सुरक्षाबलों ने उखरुल जिले के रिहायशी इलाकों और जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

असम राइफल्स ने बताया कि उसने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर शुक्रवार को नुंगशांग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया।

असम राइफल्स ने कहा, ‘‘ सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम अपराधियों का पता लगाने, छिपाकर रखे गए हथियारों एवं अन्य सामग्री के जखीरे बरामद करने तथा स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिहायशी इलाकों और आसपास के जंगलों में गहन तलाशी अभियान चला रही है।’’

छह जुलाई को उखरुल थाना क्षेत्र के नुंगशोंग खोंग में असम राइफल्स के एक काफिले पर संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में वारंट अधिकारी बलवंत सिंह और हवलदार सी.एम. सिंह की मौत हो गई थी।

असम राइफल्स ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘छह जुलाई 2026 को घात लगाकर किए गए हमले में उसके दो जवानों की मौत हो गयी। उसके बाद असम राइफल्स ने बीएसएफ और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर 10 जुलाई 2026 को मणिपुर के उखरुल जिले के नुंगशांग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया।’’

उसने कहा कि अभियान जारी है और यह शांति बहाल करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा घटना के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए सुरक्षा बलों की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस बीच, नगा संगठन एनएससीएन (आईएम) ने इस हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।

इस नगा संगठन ने कहा कि वह शांति वार्ता के प्रति समर्पित है तथा शांति प्रक्रिया को कमजोर करने वाली किसी भी कार्रवाई की निंदा करता है।

उसने सभी पक्षों से संवाद और स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी के साथ काम करने का आग्रह भी किया।

मणिपुर में तीन वर्ष पहले जातीय हिंसा भड़कने के बाद से सुरक्षा बल राज्य के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी अभियान तथा क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने की कार्रवाई कर रहे हैं।

मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग बेघर हुए हैं।

भाषा रवि कांत रवि कांत राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में