कोलकाता, छह जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी शनिवार को ऐसे समय में दिल्ली रवाना हुए, जब पार्टी नेतृत्व को इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में उसके विधायक दल पर नियंत्रण गंवाने का कारण बना विद्रोह अब संसद तक भी फैल सकता है।
अभिषेक की यह यात्रा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की बैठक के लिए राष्ट्रीय राजधानी के निर्धारित दौरे से एक दिन पहले हुई है। तृणमूल के संसदीय दल में फूट डालने की कोशिशों की खबरों के बीच इस यात्रा ने पार्टी हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया है।
मूल कार्यक्रम के अनुसार, ममता बनर्जी और अभिषेक को ‘इंडिया’ की बैठक के लिए रविवार को साथ दिल्ली जाना था।
अभिषेक के एक दिन पहले यात्रा करने की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। नेता और पर्यवेक्षक इसे सोमवार की बैठक से पहले स्थिति का आकलन करने की तृणमूल नेतृत्व की संभावित कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
तृणमूल के सूत्रों ने कहा कि पार्टी प्रमुख ने खुद अपने भतीजे से एक दिन पहले दिल्ली जाने को कहा। पार्टी नेता हालांकि रविवार को दिल्ली में उनके निर्धारित कार्यक्रमों को लेकर अनिश्चित नजर आए।
अभिषेक की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर तृणमूल के एक नेता एवं सांसद ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि अभिषेक आज दिल्ली क्यों जा रहे हैं। मैं अभी दिल्ली या कोलकाता में नहीं हूं। मैंने किसी बैठक के बारे में नहीं सुना है।’’
तृणमूल के 80 विधायकों में से 58 विधायक, यानी दो-तिहाई से अधिक विधायक कुछ ही दिन पहले पार्टी के आधिकारिक विधायक दल से अलग हो गए थे। उन्होंने निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में प्रमुख विपक्षी गुट के रूप में मान्यता हासिल कर ली। यह 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद से ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़े संगठनात्मक झटकों में से एक है।
यह विद्रोह संगठन में मुख्य रूप से अभिषेक के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ था। असंतुष्ट नेताओं ने इस विद्रोह को अनौपचारिक रूप से ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ नाम दिया था।
अब कोलकाता और दिल्ली के राजनीतिक हलकों में पार्टी के संसदीय दल में भी इसी तरह की दरार पैदा करने की संभावित कोशिशों को लेकर चर्चा तेज है।
तृणमूल के बागी विधायक और पार्टी के नए विधायक दल के उपनेता संदीपन साहा ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि नयी दिल्ली में संसदीय दल में भी ऐसा ही घटनाक्रम हो रहा है। यह अभिषेक बनर्जी के मनमाने रवैये के कारण हो रहा है।’’
बशीरहाट के सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद लोकसभा में तृणमूल के फिलहाल 28 सदस्य हैं।
दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत, किसी समूह को अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों (19 सांसदों) के समर्थन की आवश्यकता होगी, ताकि वे अलग दल बनाने का दावा कर सकें। राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं।
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने दावा किया कि संसद के दोनों सदनों में सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं।
पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि सांसदों से टेलीफोन पर संपर्क करने का सिलसिला शुक्रवार रात से तेज हो गया और यह शनिवार को भी जारी रहा, जिससे इस अटकल को बल मिला कि प्रतिद्वंद्वी खेमे संख्या बल के लिए होड़ में लगे हुए थे।
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर चिंताओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा के घटनाक्रम से स्वाभाविक रूप से आशंकाएं पैदा हुई हैं। अब हर किसी की नजर दिल्ली के घटनाक्रम पर है।’’
इस बीच, ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने कहा कि पार्टी में संभावित विभाजन की खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं और कई सांसद पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से बने हुए हैं।
संसद में असंतोष की संभावना को सार्वजनिक रूप से सबसे पहले राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने उठाया था।
हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इन संभावनाओं को खारिज किया कि पार्टी बिखराव की ओर बढ़ रही है।
भाषा सिम्मी दिलीप
दिलीप