नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जमानत मांगने वाले प्रत्येक आरोपी का यह दायित्व है कि वह जमानत संबंधी निर्णयों में एकरूपता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए हलफनामे के माध्यम से अपने पूर्व के अपराध का खुलासा करे।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जमानत मांगने वाले आरोपी या आवेदक का यह दायित्व है कि वह न्यायिक विवेक के प्रयोग को सीधे प्रभावित करने वाले सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का निष्पक्ष, पूर्ण और स्पष्ट खुलासा करे।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाना, छिपाना या चुनिंदा रूप से प्रकट करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और आपराधिक न्याय प्रशासन की मूल नींव पर प्रहार करता है।
इसने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि जमानत आवेदनों में प्राथमिकी संख्या और तिथि, संबंधित पुलिस थाने का नाम, जांच एजेंसी द्वारा लगाई गई धाराएं और कथित अपराधों के लिए निर्धारित अधिकतम सजा आदि का उल्लेख होना चाहिए।
न्यायालय ने कहा, ‘‘इस न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया जाता है कि वह इस फैसले की एक प्रति सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजें। उच्च न्यायालय अपने नियम बनाने की शक्तियों के अनुरूप उचित प्रशासनिक निर्देश जारी करने या अपने-अपने नियमों में उपयुक्त प्रावधान शामिल करने की व्यवहार्यता की जांच कर सकते हैं। मार्गदर्शन के लिए इस फैसले की एक प्रति जिला न्यायपालिका को भी भेजी जाए।’’
वकीलों को फर्जी डिग्री प्रमाणपत्र जारी करने के आरोपी व्यक्ति को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को रद्द करते हुए ये निर्देश दिए गए।
भाषा नरेश संतोष नेत्रपाल
नेत्रपाल