कोच्चि, सात जुलाई (भाषा) मलयालम अभिनेत्री रेवती और पद्मप्रिया ने फिल्मी कलाकारों के संगठन ‘अम्मा’ की सदस्यता यह कहते हुए छोड़ दी है कि वह (अम्मा) अपने सदस्यों की सुरक्षा, सम्मान, जवाबदेही और समान व्यवहार सुनिश्चित करने में “नाकाम” रही है।
रेवती और पद्मप्रिया ने आरोप लगाया कि ‘अम्मा’ पर पितृसत्तात्मकता और सत्ता की राजनीति का प्रभाव बढ़ता गया, जिससे वे आदर्श कमजोर हो गए, जिन पर इसकी नींव रखी गई थी।
दोनों अभिनेत्रियों ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर जारी एक संयुक्त बयान में कहा, “सदस्यता छोड़ना हमारे लिए हार नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान का मुद्दा है। हमने ‘एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स’ (अम्मा) से इस्तीफा देने का फैसला न तो गुस्से में लिया और न ही इसके लिए कोई एक घटना जिम्मेदार है।”
उन्होंने कहा, “आज हम ‘अम्मा’ की अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। न तो गुस्से में और न ही जल्दबाजी में। हमने मलयालम फिल्म उद्योग को दशकों दिए हैं और हमें इसकी आगे की दिशा की परवाह है।”
रेवती और पद्मप्रिया ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक सुरक्षा, सम्मान, जवाबदेही और समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा, “लेकिन इसके बजाय हमें खामोशी मिली और धीरे-धीरे हमें एहसास हुआ कि यह संस्था बदलाव के लिए तैयार नहीं है।”
रेवती और पद्मप्रिया ने कहा कि ‘अम्मा’ की सदस्यता छोड़ने के बावजूद मलयालम सिनेमा हमेशा उनका कार्यस्थल और जुनून बना रहेगा।
उन्होंने कहा, “यह ‘अम्मा’ से जुड़े विवाद का एक और अध्याय लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। हमने जल्दबाजी में इस्तीफा नहीं दिया है और न ही इसके लिए कोई एक घटना जिम्मेदार है।”
रेवती और पद्मप्रिया ‘विमेन इन सिनेमा कलेक्टिव’ (डब्ल्यूसीसी) की सदस्य हैं, जो 2017 में एक अभिनेत्री के साथ यौन उत्पीड़न की घटना के बाद मलयालम फिल्म उद्योग में सुधार के लिए अभियान चला रहा है। मामले में आरोपी अभिनेता दिलीप को पिछले साल निचली अदालत ने बरी कर दिया था।
रेवती और पद्मप्रिया के इस्तीफे ऐसे समय में आए हैं, जब ‘अम्मा’ अंदरूनी कलह से जूझ रही है।
अभिनेत्री श्वेता मेनन ने संगठन के संचालन के लिए अपनी अध्यक्षता वाली चुनी हुई कार्यकारी समिति की जगह तदर्थ समिति की नियुक्ति को अदालत में चुनौती दी है।
अदालत ने तदर्थ समिति के कामकाज पर रोक लगा दी है।
श्वेता ने पिछले महीने हुई ‘अम्मा’ की आम सभा की बैठक से बहिर्गमन किया, जबकि कुछ महिला कलाकारों ने संस्था के आर्थिक मामलों से जुड़े मुद्दे उठाए।
भाषा पारुल पवनेश
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