संविधान संशोधन विधेयक खारिज होने के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच जुबानी जंग

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संविधान संशोधन विधेयक खारिज होने के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच जुबानी जंग

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  • Publish Date - April 18, 2026 / 02:34 PM IST,
    Updated On - April 18, 2026 / 02:34 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) महिला आरक्षण को 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में खारिज होने के एक दिन बाद, शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच इसके क्रियान्वयन को लेकर तीखी बयानबाजी हुई।

भाजपा ने इस घटनाक्रम को “काला दिन” बताया तथा कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ “विश्वासघात” का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को देशभर की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा और उन्होंने अपनी “विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है।”

उन्होंने कहा, “उन्हें देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे। यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था—इसमें आपत्ति कैसी हो सकती थी?”

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के कदम ने महिला सशक्तीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है।

करंदलाजे ने कहा, “उन्होंने दक्षिण भारत को भी नुकसान पहुंचाया, जहां सीटों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हो सकती थी। महिलाओं को आरक्षण मिलना था, लेकिन उन्हें इस अवसर से वंचित कर दिया गया। यह सब राहुल गांधी के नेतृत्व में हुआ है।”

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया।

मध्य प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव स्वप्ना वर्मा ने कहा, “कांग्रेस और उसके ‘इंडिया’ गठबंधन ने एक बार फिर अपनी महिला-विरोधी मानसिकता उजागर की है। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर समर्थन करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बावजूद, राजनीतिक जिद में आकर उन्होंने सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि पूरे देश की आकांक्षाओं को नकार दिया।”

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और इसके क्रियान्वयन में देरी कर रही है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है।

उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते। हमारी आपत्ति आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी।”

थरूर ने कहा कि परिसीमन से देश के भविष्य से जुड़े “मौलिक सवाल” खड़े होते हैं और इसे जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “यह महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक खेल था। महिलाओं का इस्तेमाल अल्पकालिक राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा था। अगर सरकार मानसून सत्र में नया विधेयक लाती है और इसे परिसीमन से नहीं जोड़ती, तो हम उसे पारित करा देंगे।”

कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि महिला आरक्षण पर कोई मतभेद नहीं है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

माकपा के नेता जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सरकार की रणनीति संसद में उजागर हो गई।

उन्होंने कहा, “सरकार की संदिग्ध व षड्यंत्रकारी योजना विफल हो गई है। वे महिलाओं को ढाल बनाकर देश को गुमराह कर रहे थे। अगर उनमें जरा भी ईमानदारी है, तो वर्तमान संरचना के आधार पर एक-तिहाई आरक्षण लागू करें।”

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था। फिर संशोधन लाने की क्या जरूरत थी? जब आपके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं था, तो इसे लाने का क्या मतलब था? इससे साफ है कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद था।”

महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को निचले सदन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण खारिज हो गया।

विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि इसे पारित करने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।

भाषा जोहेब मनीषा

मनीषा