अहमदाबाद बम धमाका: दोषियों का समाज में रहना “आदमखोर तेंदुए” को खुला छोड़ने के समान: कोर्ट

अहमदाबाद धमाके के दोषियों का समाज में रहना आदमखोर तेंदुए को खुला छोड़ने के समान: विशेष अदालत

अहमदाबाद बम धमाका: दोषियों का समाज में रहना “आदमखोर तेंदुए” को खुला छोड़ने के समान: कोर्ट
Modified Date: November 29, 2022 / 08:44 pm IST
Published Date: February 20, 2022 12:03 pm IST

Special court on Ahmedabad blast  : अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए 18 सिलसिलेवार बम धमाकों पर दिए अपने फैसले में विशेष अदालत ने कहा कि 38 दोषी मौत की सजा के लायक हैं क्योंकि ऐसे लोगों का समाज में रहना ”आदमखोर तेंदुए” को खुला छोड़ने के समान है जोकि बिना इसकी परवाह किये बिना निर्दोष लोगों को मारता है कि वे बच्चे हैं, युवा हैं, बुजुर्ग हैं या किसी भी जाति व समुदाय के हैं।

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अदालत के फैसले की प्रति शनिवार को वेबसाइट पर उपलब्ध हुई। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के 38 सदस्यों को मौत की सजा सुनाई। इसी मामले में अदालत ने 11 अन्य को उम्रकैद की सुजा सुनाई। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक अन्य घायल हो गए थे।

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विशेष न्यायाधीश ए आर पटेल ने अपने आदेश में कहा, ” दोषियों ने एक शांतिपूर्ण समाज में अशांति उत्पन्न की और यहां रहते हुए राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया। उनका संवैधानिक तरीके से चुनी गई केंद्र और गुजरात सरकार के प्रति कोई सम्मान नहीं है और इनमें से कुछ सरकार और न्यायपालिका में नहीं बल्कि केवल अल्लाह में भरोसा करते हैं।”

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