एआई 171 विमान हादसा : मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले बचावकर्मी को ज्यादा जानें न बचा पाने का अफसोस

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एआई 171 विमान हादसा : मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले बचावकर्मी को ज्यादा जानें न बचा पाने का अफसोस

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 12:29 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 12:29 PM IST

अहमदाबाद, 11 जून (भाषा) अहमदाबाद में पिछले साल हुई एआई-171 विमान दुर्घटना के स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल सतिंदर सिंह संधू को इस बात का बेहद अफसोस है कि वह हादसे के बाद ज्यादा लोगों की जान नहीं बचा पाए।

अहमदाबाद में दुनिया के सबसे खतरनाक विमान हादसों में से एक, एआई-171 हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे के एक साल बाद ‘108 आपात सेवा’ के 45 वर्षीय सुपरवाइज़र का कहना है कि जब भी वह उस इलाके से गुजरते हैं, तो उन्हें इस हादसे की यादें ताजा हो जाती हैं।

संधू असरवा में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के गेट नंबर 8 पर तैनात थे। बीजे मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर से मुश्किल से 200 मीटर दूर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। वहां काम कर रहे संधू एक ज़ोरदार धमाके से चौंक गए, फिर उन्होंने धुएं का घना गुबार उठते देखा।

वह मौके पर दौड़े और कई घायलों को बचाने में मदद की, जिसमें ‘चमत्कारिक रूप से’ बचने वाले विश्वास कुमार रमेश भी शामिल थे, जो हादसे में अकेले जीवित बचे थे। उन्हें बाद में इस हादसे की गंभीरता के बारे में पता चला।

संधू ने अगली सुबह साढ़े चार बजे तक बचाव कार्य किया, 108 आपात सेवाओं की 35 एम्बुलेंस को अपनी निगरानी में सक्रिय रखा, घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाया। अगले हफ्ते तक काम जारी रहा क्योंकि बचाव दल जले हुए लोगों और उनके शरीर के हिस्सों को मलबे से बाहर निकाल रहे थे।

गत वर्ष 12 जून को सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद लंदन जाने वाली एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में एक छात्रावास परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें विमान में सवार 241 लोग और जमीन पर 19 लोग मारे गए।

संधू ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 12 जून, 2025 को वह ड्यूटी पर किसी भी आम दिन की तरह वह काम कर रहे थे। दोपहर में भोजन करने से पहले ठीक एक बजकर 31 मिनट पर उन्होंने एक ज़ोरदार धमाका सुना और पास के छात्रावास परिसर से धुएं का घना बादल उठते देखा जो सिर्फ 200 मीटर दूर था।

एम्बुलेंस को उस जगह पर जाने के लिए कहने के बाद संधू भी उस तरफ़ दौड़े। उन्होंने समझा था कि यह बम विस्फोट होगा। लेकिन उन्हें बताया गया कि एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।

संधू ने अपने वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र शाही को आग और एम्बुलेंस की ज़रूरत के बारे में बताया और उनसे दमकल विभाग को भी सूचित करने का अनुरोध किया।

उन्होंने बताया ‘‘बहुत डरावना दृश्य था। भीषण आग लगी थी, और बीजे मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर के अंदर और आस-पास की सड़कों पर लाशें और घायल लोग पड़े थे। हमारी प्राथमिकता ज़्यादा से ज़्यादा जानें बचाने की थी।’’

संधू और उनके सहयोगियों ने सबसे पहले एक माली को जली हालत में अस्पताल पहुंचाया। जल्द ही, तीन लोगों का एक परिवार छात्रावास परिसर से बाहर आया, और तीनों को अस्पताल ले जाया गया।

उन्होंने बताया ‘‘एक आदमी गेट से निकला और फिर छात्रावास परिसर में जाने की कोशिश की। उसने ऐसा दो बार किया और मैंने उसे रोका। वह घायल था, मैंने उसे हमारी एक एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाने का इंतज़ाम किया। उस समय, मुझे लगा कि वह छात्रावास में ही रहता है। बाद में उस शाम, जब उसके वीडियो वायरल हुए, तो पता चला कि वह विश्वास कुमार रमेश थे।’’

विश्वास कुमार रमेश विमान हादसे में जीवित बचे एकमात्र यात्री थे।

संधू ने बताया कि कुछ ही देर में, 108 इमरजेंसी सर्विस ने 35 एम्बुलेंस भेज दीं। दूसरे संगठनों की एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की टीमें, पुलिस वाले, अन्य अधिकारी और दूसरी एजेंसियां ​​आ गईं, और बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया।

उन्होंने बताया ‘‘हमने घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाना शुरू किया, क्योंकि हमारी प्राथमिकता ज़्यादा से ज़्यादा जानें बचाने की थी। पहले कुछ घंटों में करीब 70 घायलों को अस्पताल ले जाया गया। हमारा काम अगले दिन सुबह 4.30 बजे तक चला। मलबे से जले शव निकालकर अस्पताल ले जाए जा रहे थे। अगले हफ़्ते, हमारी ड्यूटी शवों और मानव अंगों को ले जाने की थी।’’

संधू ने कहा कि यह घटना बहुत ही स्तब्ध करने वाली थी, हममें से किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। उन्होंने कहा, ‘‘अफ़सोस यह है कि हम ज़्यादा ज़िंदगी नहीं बचा पाए।’’

भाषा

मनीषा वैभव

वैभव