एआई की वैश्विक यात्रा में ‘आकांक्षी भारत’ के लिए महत्वपूर्ण भूमिका : प्रधानमंत्री मोदी

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एआई की वैश्विक यात्रा में ‘आकांक्षी भारत’ के लिए महत्वपूर्ण भूमिका : प्रधानमंत्री मोदी

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 02:43 PM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 02:43 PM IST

( तस्वीरों सहित )

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में कदाचार की संभावनाओं को असीमित बताते हुए इसके नैतिक उपयोग के लिए सुझाव दिए जिनमें डेटा संप्रभुता का सम्मान करना और पारदर्शी सुरक्षा नियम बनाना शामिल है।

मोदी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में नेताओं के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वैश्विक यात्रा में ‘आकांक्षी भारत’ के लिए एक प्रमुख भूमिका है।

उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है जिन्होंने कहा था कि सही कर्म सही समझ से आता है और इसीलिए यह बहुत आवश्यक है कि हर कोई एक साथ आकर एक ऐसा रोडमैप तैयार करे जो एआई के सही प्रभाव को दर्शाता हो।

मोदी ने यहां भारत मंडपम में विश्व नेताओं की उपस्थिति में कहा, ‘‘और सही प्रभाव तभी पड़ता है जब हम सही समय पर, सही इरादे के साथ सही निर्णय लेते हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में अनैतिक व्यवहार की संभावनाएं असीमित हैं और इसीलिए, सभी को एआई के लिए नैतिक व्यवहार एवं मानदंडों के ढांचे का विस्तार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘एआई कंपनियों पर बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।’’

मोदी ने एआई के नैतिक उपयोग के लिए तीन सुझाव दिए जिनमें डेटा संप्रभुता का सम्मान करना; एआई प्रशिक्षण के लिए सभी के द्वारा एक स्पष्ट डेटा ढांचा तैयार करना शामिल है। उन्होंने कहा कि एआई प्लेटफॉर्म को अपने सुरक्षा नियमों को बहुत स्पष्ट और पारदर्शी रखना चाहिए। मोदी ने कहा कि एआई को स्पष्ट मानवीय मूल्यों की भी आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी शक्तिशाली हो सकती है, लेकिन दिशा हमेशा मनुष्यों द्वारा ही निर्धारित की जाएगी।’’

‘यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस’ (यूपीआई) की कार्यकुशलता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने यूपीआई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि लोग आसानी से भुगतान कर सकें और यूपीआई ने डिजिटल विभाजन को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में, हमने एक जीवंत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण किया है। हम इसे दुनिया के साथ भी साझा कर रहे हैं क्योंकि हमारे लिए प्रौद्योगिकी शक्ति का साधन नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है।’’

भाषा नेत्रपाल मनीषा

मनीषा