(तस्वीर के साथ)
चेन्नई, 14 मई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) में जारी खींचतान बृहस्पतिवार को और बढ़ गई, जब सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि नीत गुट ने अन्नाद्रमुक प्रमुख ईके पलानीस्वामी और उनके साथी विधायकों पर तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के विश्वास मत के सिलसिले में पार्टी की ओर से जारी व्हिप का “उल्लंघन” करने का आरोप लगाया तथा उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य घोषित किए जाने की मांग की।
हालांकि, पलानीस्वामी ने विरोधी गुट पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उसके सदस्य मंत्री पद के लालच में आ गए हैं और उनके खिलाफ दुष्प्रचार फैला रहे हैं।
पलानीस्वामी ने एक बयान में दावा किया, “वे छह मंत्री पद और 10 बोर्ड प्रमुख पद के लालच में फंस गए। यह बेहद दुखद है कि पार्टी के साथ विश्वासघात करने वाले लोग मेरे बारे में दुष्प्रचार फैला रहे हैं।”
वेलुमणि ने पलानीस्वामी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोधी खेमा मंत्री पद के पीछे नहीं भाग रहा है, क्योंकि “अम्मा (दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता) ने हमें पद दिए थे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक को 2019 से लेकर अब तक केवल चुनावी हार का सामना करना पड़ा है और वे (षणमुगम-वेलुमणि गुट) पार्टी की आम परिषद में केवल इस पर चर्चा करना चाहते थे।
इससे पहले, षणमुगम-वेलुमणि गुट ने दावा किया कि उसे पार्टी के 47 विधायकों का समर्थन हासिल है।
षणमुगम-वेलुमणि गुट के सचेतक सी विजयभास्कर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विधायक दल का फैसला बहुमत के आधार पर होता है। उन्होंने संकेत दिया कि षणमुगम-वेलुमणि गुट को वह बहुमत हासिल है।
विजयभास्कर ने कहा कि बुधवार को विश्वास मत के दौरान विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान करने के उनके निर्देश के बारे में व्हाट्सएप और ईमेल के जरिये सभी अन्नाद्रमुक विधायकों को विधिवत रूप से सूचित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, “कुल 47 विधायकों में से 25 ने निर्देश का पालन किया। एडप्पाडी पलानीस्वामी समेत पार्टी के 22 विधायकों ने अन्नाद्रमुक के सचेतक के रूप में मेरी ओर से जारी निर्देश पर अमल नहीं किया तथा उसके खिलाफ कदम उठाया। इसलिए हमने आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और दलबदल रोधी कानून के तहत उन्हें (पलानीस्वामी) तथा उनके साथी विधायकों को (विधानसभा की सदस्यता से) अयोग्य ठहराए जाने की मांग की।”
विजयभास्कर ने कहा, “वेलुमणि गुट के अधिकांश विधायकों ने ‘व्हिप’ का पालन किया। केवल बहुमत ही मान्य है।”
वेलुमणि ने पूर्व के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी पार्टी में मतभेद के कारण फूट पड़ती है, तो कोई फैसला नहीं लिया जा सकता; न ही किसी को पार्टी के पदों या संगठन में नियुक्त किया जा सकता है या हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “हमारा रुख स्पष्ट है-(पलानीस्वामी को) चुनाव में हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए पार्टी की आम परिषद की बैठक बुलानी चाहिए। वह महासचिव हैं।”
वेलुमणि ने पलानीस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के पदाधिकारियों को बर्खास्त करने और उनकी जगह नयी नियुक्तियां करने का अन्नाद्रमुक महासचिव का कदम “वैध नहीं” था।
उन्होंने कहा, “हमारा मकसद अन्नाद्रमुक को मजबूत करना है। पार्टी छोड़कर गए लोगों, पार्टी से निकाले गए लोगों को वापस लाएं। एमजीआर ने पार्टी की स्थापना क्यों की थी-द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का विरोध करने के लिए?”
वेलुमणि ने कहा कि पार्टी में विभिन्न पदों पर तैनात पदाधिकारियों को हटाने का पलानीस्वामी का फैसला वैध नहीं है और “ये लोग अपने-अपने पदों पर बने हुए हैं।”
अन्नाद्रमुक प्रमुख ने टीवीके सरकार के विश्वास मत के दौरान मतदान को लेकर हुए मतभेद और ‘क्रॉस-वोटिंग’ के मद्देनजर षणमुगम, वेलुमणि और अन्य को पार्टी पदों से हटा दिया था। विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया था।
इस बीच, पलानीस्वामी ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के कारण हुई ‘क्रॉस वोटिंग’ के बाद आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
उन्होंने बाद में एक बयान में विरोधी खेमे पर जमकर निशाना साधा।
पलानीस्वामी ने दावा किया कि तमिलनाडु की जनता ने अन्नाद्रमुक की सरकार बनाने के लिए वोट दिया था, लेकिन पार्टी के कुछ विधायकों ने व्हिप के “आधिकारिक” आदेश के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार के अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा, “यह कृत्य पार्टी के साथ घोर विश्वासघात है।”
अन्नाद्रमुक में बढ़ती खींचतान के बीच किसी अप्रिय घटना की आशंका टालने के लिए पार्टी मुख्यालय ‘पुरची थलाइवर एमजीआर मालीगई’ में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं।
साल 2022 में पलानीस्वामी और तत्कालीन पार्टी नेता ओ पनीरसेल्वम के बीच नेतृत्व को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें अन्नाद्रमुक मुख्यालय को निशाना बनाया गया था और वहां तोड़फोड़ की गई थी।
षणमुगम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जब तक उनके गुट को न्याय नहीं मिल जाता, उनके समर्थक विधायक और वरिष्ठ नेता अन्नाद्रमुक मुख्यालय नहीं आएंगे।
उन्होंने कहा, “मैं किसी भी स्थिति में मुख्यालय नहीं जाऊंगा। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि दोनों गुटों के बीच कोई झड़प न हो।”
पलानीस्वामी ने बागी गुट का मुकाबला करने की रणनीति पर चर्चा के लिए अपने आवास पर समर्थक विधायकों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता भी की।
बड़ी संख्या में अन्नाद्रमुक कार्यकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री (पलानीस्वामी) के आवास पर फूलों का गुलदस्ते लेकर अपना समर्थन जताने पहुंचे। नव नियुक्त पदाधिकारियों ने भी उनसे मुलाकात की।
इस बीच, पलानीस्वामी के समर्थक विधायक एग्री एस कृष्णमूर्ति और थलवई एन सुंदरम ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात कर बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने के अनुरोध वाली अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग की।
पलानीस्वामी गुट ने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने बुधवार को विधानसभा में टीवीके सरकार के बहुमत परीक्षण के दौरान पार्टी के निर्देशानुसार मतदान नहीं किया।
पलानीस्वामी ने तिरुत्तानी से अन्नाद्रमुक विधायक जी हरि को भी बृहस्पतिवार को उनके पार्टी पदों से हटा दिया।
अन्नाद्रमुक प्रमुख ने एक विज्ञप्ति में कहा कि हरि को संगठन सचिव समेत पार्टी के सभी पदों से “हटा दिया गया” है। हरि विरोधी खेमे (षणमुगम-वेलुमणि गुट) का हिस्सा हैं।
भाषा पारुल माधव
माधव