लेह/जम्मू, 11 मई (भाषा) लद्दाख को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट पश्मीना के केंद्र के रूप में स्थापित करने के अपने दृष्टिकोण को दोहराते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि पश्मीना उत्पादन में लगे चांगथांग के खानाबदोश चरवाहों और पशुपालक समुदायों को अधिक पहचान और आर्थिक लाभ सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
सक्सेना ने इस बात पर जोर दिया कि लद्दाख में स्थानीय प्रसंस्करण को मजबूत करके, गुणवत्ता मानकों में सुधार करके और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर क्षेत्र की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करते हुए पश्मीना (बहुत बारीक और मुलायम ऊन) उत्पादकों की आजीविका में काफी सुधार किया जा सकता है।
अपनी यात्रा के दौरान सक्सेना ने लेह के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ‘पश्मीना डीहेयरिंग प्लांट’ (पश्मीना साफ करने का संयंत्र) का निरीक्षण किया और चांगथांगी बकरी (पश्मीना बकरी) से प्राप्त कच्चे पश्मीना रेशे के प्रसंस्करण में शामिल विभिन्न चरणों और इसके संचालन की समीक्षा की।
उन्होंने कहा, ‘लद्दाख को बेहतरीन पश्मीना के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना हमारा लक्ष्य है। पश्मीना उत्पादन में लगे चांगथांग क्षेत्र के खानाबदोश चरवाहों और पशुपालक समुदायों को अधिक पहचान और आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना आवश्यक है।’
अधिकारियों ने उपराज्यपाल को सूचित किया कि लद्दाख में उत्पादित पश्मीना रेशे का केवल लगभग 24 प्रतिशत ही स्थानीय स्तर पर उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि बेंगलुरु और दिल्ली के केंद्रों में पश्मीना रेशे की कताई-बुनाई के लिए किए गए प्रायोगिक प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
भाषा
शुभम संतोष
संतोष