अहमदाबाद, 12 जून (भाषा) अहमदाबाद में पिछले साल हुए एअर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वाले 260 लोगों में से 15 लोगों के परिवारों ने अपने प्रियजनों का निजी सामान लेने से इनकार कर दिया है। विमानन कंपनी का स्वामित्व रखने वाले टाटा समूह ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
टाटा समूह ने एक बयान में बताया कि हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये अनुग्रह राशि देने का 91 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है जबकि बाकी मामलों में मुख्य रूप से कागज़ात अधूरे हैं या परिवारों ने राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
बयान के मुताबिक एअर इंडिया ने मृतकों के परिवारों को उनकी तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद के लिए 25-25 लाख रुपये का अंतरिम भुगतान किया है और 96 प्रतिशत मृतकों के परिवारों को अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है। उसने बताया कि बाकी मामले मुख्य रूप से वे हैं जिनमें कागज़ी कार्रवाई अधूरी है या परिवार में आपसी विवाद चल रहे हैं।
टाटा समूह ने कहा कि मृतक के निजी सामान को लौटाने की प्रक्रिया ‘‘बेहद सम्मान, गरिमा और सटीकता’’ के साथ पूरी की गई।
बयान के मुताबिक 22,000 से ज्यादा निजी सामानों को सुरक्षित रखा गया और उनकी सूची बनाई गई तथा परिवारों को ईमेल के जरिए इन सभी सामान की जानकारी दी गई एवं एक समर्पित वेबसाइट भी बनाई गई।
टाटा समूह ने बताया कि 15 मृतकों के परिवारों ने अपने प्रियजनों के निजी सामान लेने से इनकार कर दिया है।
बयान में कहा गया, ‘‘ 187 मृतकों से जुड़ी निजी वस्तुओं में से भारत और ब्रिटेन में 139 मृतकों की निजी वस्तुएं उनके परिजनों को लौटा दी गई हैं। बाकी मामलों में मुख्य रूप से या तो दस्तावेज अधूरे हैं या परिवारों ने निजी सामान लेने से मना कर दिया है।’
कंपनी ने कहा कि संबंधित निजी सामान वे वस्तुएं हैं जिन्हें दस्तावेज़ों, लेबलिंग, मिलने की जगह या सत्यापित की गई पहचान के आधार पर पुख्ता तौर पर किसी व्यक्ति से जोड़ा जा सकता है। उसने कहा कि इनमें से हर वस्तु की कई स्तरों पर जांच की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिश्तेदारों को लौटाया जाने वाला सामान सही और पूरा हो।
टाटा समूह ने बताया कि ‘‘77 मृतकों से जुड़ी जिन निजी वस्तुओं का सीधे तौर पर किसी से संबंध नहीं पाया गया था, में से भारत और ब्रिटेन में 60 मृतकों के परिवारों को सामान लौटाया जा चुका है। बाकी मामलों में मुख्य रूप से या तो दस्तावेज अधूरे हैं या फिर परिवारों ने निजी सामान लेने से इनकार कर दिया है।
कंपनी ने बिना पहचान वाली निजी वस्तुओं की श्रेणी में उन सामानों को रखा गया, जिन्हें सीधे तौर पर किसी व्यक्ति विशेष से नहीं जोड़ा जा सकता। इनमें बिना नाम वाली चीज़ें या ऐसी वस्तुएं शामिल हो सकती हैं जिन्हें इस तरह से बरामद किया गया हो कि हम उन्हें पुख्ता तौर पर किसी व्यक्ति से न जोड़ सकें।
टाटा ग्रुप ने कहा कि परिवारों के दुख और निजता का सम्मान करते हुए सामान उन्हें व्यक्तिगत रूप से और सीधे सौंपें गए। यह प्रक्रिया आवश्यक नियामक मंजूरी लेने के बाद पूरी की गई।
बयान के मुताबिक बरामद किए गए 25 डिजिटल उपकरणों में से 16 उनके संबंधित परिवारों को लौटा दिए गए हैं। बाकी मामलों में मुख्य रूप से या तो दस्तावेजी कार्रवाई अधूरी है या परिवारों ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया है।
कंपनी ने कहा कि एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा टाटा समूह की परोपकारी प्रतिबद्धताओं के तहत की गई थी और यह कानूनी मुआवजे की जरूरतों से कहीं ज्यादा थी।
टाटा समूह के मुताबिक हादसे की वजह से जमीन पर घायल हुए 94 प्रतिशत लोगों को, चोट की गंभीरता और आजीविका के नुकसान के आधार पर, या तो एकमुश्त और अंतिम मुआवजा दिया गया या फिर अंतरिम मुआवजा राशि दी गई। शेष छह प्रतिशत लोगों ने दुर्घटना के बाद हेल्पडेस्क से आवेदन लिया था, लेकिन तब से उसे जमा नहीं किया है।
कंपनी ने कहा,‘‘ अधिकतर अंतरिम भुगतान किए जा चुके हैं, इसलिए एअर इंडिया ने अब अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है और परिवारों से बातचीत कर रही है। परिवारों या व्यक्तियों पर हमारी पेशकश को किसी तय समय-सीमा के भीतर स्वीकार करने का कोई दबाव या समय-सीमा नहीं है।’’
बयान के मुताबिक हादसे के बाद टाटा संस ने पीड़ितों की मदद के लिए एआई171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट का गठन किया था।
कंपनी ने बताया कि टाटा समूह की 17 कंपनियों के 500 से ज्यादा स्वयंसेवकों की एक टीम दुर्घटना वाली जगह पर तुरंत और ज़मीनी स्तर पर मदद देने के लिए मौजूद थी। इनमें एअर इंडिया के 130 कर्मी भी शामिल थे।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश