नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सालबोनी में भूमि हड़पने के मामले में तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने रॉय को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सरकारी भूमि से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका तीन अगस्त को खारिज कर दी थी। इस मामले की जांच सालबोनी पुलिस कर रही है।
यह मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित दंडात्मक प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने रॉय की ओर से बृहस्पतिवार को पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की दलीलों पर गौर किया और उन्हें हर प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता जारी जांच में पूरा सहयोग करे। उसके साथ कोई अधिवक्ता या अन्य व्यक्ति नहीं होना चाहिए। वह सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक जांच के लिए उपलब्ध रहेगा। उसकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।’’
शंकरनारायणन ने कहा कि कथित तौर पर पैसे लेकर नौकरी देने के घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में उनके मुवक्किल को कलकत्ता उच्च न्यायालय पहले ही अग्रिम जमानत दे चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में प्राथमिकी नयी सरकार के सत्ता संभालने के बाद ही दर्ज की गई।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कथित अपराध कई वर्ष पहले किया गया था लेकिन पिछली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सॉलिसिटर जनरल ने अंतरिम राहत दिए जाने का भी कड़ा विरोध किया और कहा कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है।
विधि अधिकारी ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पहले जब आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था तो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उसमें बाधा डाली थी।
उन्होंने संबंधित सामग्री हलफनामे के जरिये अदालत के समक्ष रखने की अनुमति मांगी।
भाषा
सिम्मी रंजन
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