चंडीगढ़, 29 जून (भाषा) अकालतख्त ने बेअदबी के खिलाफ कानून, ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून, 2026’ के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है और इस कानून पर स्पष्टीकरण के लिए सोमवार को अमृतसर में मंत्रियों सहित सभी सिख विधायकों को तलब किया।
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने पंजाब सरकार पर धार्मिक मामलों और उसके अधिकार क्षेत्र में दखल देने का आरोप लगाया है।
बेअदबी विरोधी कानून के खिलाफ अकालतख्त की मुख्य आपत्तियां:
1. पंजाब सरकार ने अकालतख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) से सलाह किए बिना बेअदबी-विरोधी कानून बनाया। ये दोनों सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्थाएं हैं।
2. अकालतख्त ने कानून की धारा दो पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ‘बीर’ और ‘बीरों’ शब्दों की जगह ‘स्वरूप’ (गुरु ग्रंथ साहिब की प्रति) और ‘स्वरूपों’ शब्द इस्तेमाल किए जाने चाहिए।
अकालतख्त के जत्थेदार ने कहा कि विधानसभा को सिखों की शब्दावली के बारे में फ़ैसला करने का कोई अधिकार नहीं है और यह पूरी तरह से अकालतख्त का अधिकार क्षेत्र है।
3. अकालतख्त ने धार्मिक ग्रंथ के ‘संरक्षक’ की भूमिका पर भी सवाल उठाया, जो ‘स्वरूप’ की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ‘‘सिख रहत मर्यादा’’ (सिख आचार संहिता) के पालन के लिए जिम्मेदार होता है।
अकालतख्त के अनुसार, विधानसभा ‘सिख रहत मर्यादा’ तय नहीं कर सकती और न ही किसी ‘संरक्षक’ की जिम्मेदारियां निर्धारित कर सकती है। इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार केवल अकालतख्त को ही है।
4. अकालतख्त ने कानून की धारा 3ए पर भी आपत्ति जताई, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की छपाई, भंडारण और आपूर्ति से संबंधित विवरणों का भौतिक तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप में एक केंद्रीय रजिस्टर बनाए रखने का प्रावधान किया गया है।
5. अकालतख्त ने अधिनियम की धारा पांच पर भी सवाल उठाया, जिसमें बेअदबी के कृत्य को छोड़कर अन्य अपराधों के लिए पांच वर्ष तक के कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
अकालतख्त का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग ग्रंथियों, सेवादारों या गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों के खिलाफ किया जा सकता है।
अकालतख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने सोमवार को पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर बेअदबी-विरोधी कानून की आपत्तिजनक धाराओं को हटाए। यह निर्देश तब दिया गया जब राज्य के सभी सिख विधायक, जिनमें मंत्री भी शामिल थे, बुलाए जाने पर सिखों की सर्वोच्च पीठ के सामने पेश हुए।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश