असीमित अवसरों के साथ-साथ, युवा पीढ़ी को अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है : मुर्मू

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असीमित अवसरों के साथ-साथ, युवा पीढ़ी को अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है : मुर्मू

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 07:21 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 07:21 PM IST

वडोदरा (गुजरात), 23 सितंबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को यहां कहा कि असीमित अवसरों के साथ-साथ युवा पीढ़ी के सामने अनेक चुनौतियां भी हैं, ऐसे में यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि उनको सशक्त, सफल, संस्कारी तथा आत्मनिर्भर बनाए।

वडोदरा के निकट पादरा में ब्रह्माकुमारीज के “ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस” रिट्रीट सेंटर के उद्घाटन समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना तभी सच हो पाएगा जब देश के युवा जागरूक होंगे।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “जब युवा अपने विचारों और भावनाओं को सकारात्मक दिशा में लगाते हैं, तो इसका असर उनके परिवारों, कार्यस्थलों, समुदायों और अंततः पूरे देश पर पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “अगर युवा जागृत हों, तो 2047 तक “विकसित भारत’ का सपना — जो न केवल आर्थिक बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी विकसित हो — साकार किया जा सकता है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें “सफल, सुसंस्कृत, आत्मनिर्भर, शांतिप्रिय और जिम्मेदार” बनाना समाज की “सामूहिक जिम्मेदारी” है।

मुर्मू ने कहा, “बेहिसाब मौकों के साथ-साथ, युवा पीढ़ी को डिजिटल दुनिया, जानकारी की अधिकता, प्रतिस्पर्धा, बदलती जीवनशैली और सामाजिक उम्मीदों जैसी कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।”

उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का युवाओं पर बुरा असर पड़ता है और “हमें उन्हें आध्यात्मिकता और सकारात्मकता की ओर ले जाना चाहिए”।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसलिए आंतरिक शक्ति खासकर आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-अनुशासन को बढ़ाना बहुत जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि इस संदर्भ में, ब्रह्माकुमारीज जैसे संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दुनिया भर में उथल-पुथल के माहौल के साथ-साथ हिंसा, असहिष्णुता और सामाजिक बंटवारे से जुड़ी चुनौतियों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में ध्यान, आत्म-चिंतन, करुणा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली पहल बहुत जरूरी हो जाती हैं।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश