तृणमूल में कलह के बीच अभिषेक बनर्जी ने सुलह का रुख अपना, कल्याण बनर्जी ने भी उसी तरह का व्यवहार रखा

तृणमूल में कलह के बीच अभिषेक बनर्जी ने सुलह का रुख अपना, कल्याण बनर्जी ने भी उसी तरह का व्यवहार रखा

तृणमूल में कलह के बीच अभिषेक बनर्जी ने सुलह का रुख अपना, कल्याण बनर्जी ने भी उसी तरह का व्यवहार रखा
Modified Date: June 13, 2026 / 12:41 am IST
Published Date: June 13, 2026 12:41 am IST

कोलकाता, 12 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को संयमित रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ टकराव की अटकलों को विराम देने की कोशिश की। अभिषेक ने कल्याण बनर्जी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है, जिससे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच सुलह और संतुलन का संदेश देने का प्रयास नजर आया।

अभिषेक की इस पहल का श्रीरामपुर के दिग्गज सांसद ने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने अभिषेक की बात का स्वागत करते हुए उन्हें ‘‘बेटे जैसा’’ बताया और इस बात पर बल दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ लड़ाई में पार्टी के सभी नेताओं का एकजुट रहना जरूरी है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इससे महज 24 घंटे पहले कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोलते हुए उन पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की घोषणा की थी और यहां तक कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम भी दे दिया था कि वह अपने भतीजे और उन जैसे वरिष्ठों में से किसी एक को चुनें।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद ममता बनर्जी के कालीघाट आवास से निकलते हुए अभिषेक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘कल्याण बनर्जी ने मुझे बचपन से देखा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें मुझे दो-चार कड़ी बातें कहने का पूरा हक है। इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोई जरूरत नहीं है।’’

अभिषेक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं उनके बयान का स्वागत करता हूं। वह मेरे बेटे जैसे हैं। अच्छा है कि उन्होंने अपनी गलती समझी। हम सबको मिलकर भाजपा के खिलाफ काम करना और लड़ना है।’’

यह सुलह ऐसे समय में हुई जब सत्तारूढ़ पार्टी हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी करारी हार के नतीजों और अपने विधायी व संसदीय दोनों धड़ों में बढ़ती उथल-पुथल से जूझ रही है। राजनीतिक जानकारों ने अभिषेक की प्रतिक्रिया को एक और आंतरिक विवाद को बड़े संगठनात्मक संकट में तब्दील होने से रोकने की कोशिश के रूप में देखा।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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