Amit Shah Parliament Speech: सदन में किनका माइक होगा बंद? अमित शाह ने इनकी ओर किया इशारा, राहुल गांधी पर भी कसा तगड़ा तंज

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सदन में किनका माइक होगा बंद? अमित शाह ने इनकी ओर किया इशारा, Amit Shah Parliament Speech on no-confidence motion

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 06:09 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 06:09 PM IST

नई दिल्लीः Amit Shah Parliament Speech: लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आधारित चर्चा में बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना अफसोसजनक, क्योंकि स्पीकर किसी एक दल के नहीं है, वे सभी के हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, अरे भाई यहां नियमों से बोलना पड़ता है, यहां इतने वरिष्ठ सदस्य बैठे हैं, मुझे तो अभी भी नहीं मालूम पड़ता कि शशि थरूर, बालू साहब बैठे हैं, क्यों नहीं सिखाते उन्हें। इतना सीखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए। वे कहते हैं, हमें बोलने नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि जो नियम से नहीं चलेंगे,उनका माइक बंद होगा

शाह ने बताई विपक्ष की गलती

Amit Shah Parliament Speech: इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा और कहा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव के नोटिस में 2026 की जगह 2025 लिखा था। जब विपक्ष के ध्यान में लाया गया तो उन्होंने नोटिस वापस ले लिया। दूसरे नोटिस में सिर्फ गौरव गोगई के रियल साइन थे। सभी विपक्षी सांसदों को जेरोक्स साइन थे। ऐसे में नोटिस खारिज हो सकता है। लेकिन इनमें इतनी गंभीरता नहीं है कि नोटिस नियमों के हिसाब से लाएं। फिर भी स्पीकर के ऑफिस ने विपक्ष को मौका दिया कि गलतियां है। सुधार लो। ये सदन में गंभीरता की बात करती हैं। मोरल ग्राउंड के आधार पर ओम बिरला ने दो-दो बार प्रस्ताव सुधारने का मौका दिया।

शाह ने कहा- ये सदन है.. कोई मेला नहीं

अमित शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए स्पीकर मध्यस्थता करवाते हैं। ये सदन कोई मेला नहीं है। इसके नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जब आप सदन के नियमों को नजरअंदाज करोगे, तो स्पीकर का दायित्व है कि इसे रोके और टोके। ये अधिकार ये नियम हमने नहीं बनाए। ये नेहरू के समय में बने हैं। अधिकारों के संरक्षण के लिए हम सहमत हैं लेकिन नियमों का क्या। सबको नियमों के अनुसार बोलना पड़ेगा, चाहे वह कोई भी हो। मतभेद तो सभी सदस्यों के हो सकते हैं, लेकिन स्पीकर के फैसलों पर शक नहीं कर सकते। कभी हमें अनुकूल नहीं लगेगा, कभी विपक्ष को अनुकूल नहीं लगेगा। लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना घोर निंदनीय है। जिसको मध्यस्थता करनी है, उसकी निष्ठा पर आप सवाल करते हो। ये बहुत अफसोस की बात है।

‘स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आम घटना नहीं’

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘लोकसभा स्पीकर का महत्व सदन, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। जब आप उनकी निष्ठा पर सवाल उठाते हैं, तो आप लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठाते हैं।आप पीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाइए, हम नहीं कहेंगे की यह अफसोसजनक है। लेकिन स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आम घटना नहीं है। 94 C के तहत स्पीकर को केवल असाधारण परिस्थिति में हटाया जा सकता है। उन्हें हटाने के लिए इफेक्टिव मेजोरिटी चाहिए। एक तरह से संरक्षण दिया है। पूरी दुनिया को मालूम के 2026 चल रहा है लेकिन प्रस्ताव में 2025 लिखा है। जब विपक्ष के ध्यान में लाया गया तो उन्होंने नोटिस वापस ले लिया। दूसरे नोटिस में सिर्फ गौरव गोगई के रियल साइन थे। सभी विपक्षी सांसदों को जेरोक्स साइन थे।