Amit Shah Parliament Speech/Image Credit: IBC24.in
Amit Shah Parliament Speech: नई दिल्ली: विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। कांग्रेस सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने मंगलवार को सदन में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। मंगलवार को कांग्रेस की ओर से तरुण गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की थी। वहीं आज इस प्रस्ताव पर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में चर्चा की।
गृAmit Shah Parliament Speech: हमंत्री अमित शाह ने कहा कि, स्पीकरसभी होते हैं, लेकिन स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है। गृहमंत्री शाह ने आगे कहा कि, जब ओम बिरला स्पीकर चुने गए थे, तब पक्ष और विपक्ष उनके चेयर तक लेकर गए थे। स्पीकर सभी सदस्यों के हितों के संरक्षक होते हैं, यह संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक पल है। (Amit Shah Parliament Speech) स्पीकर की निष्ठा पर विपक्ष ने सवाल उठाए। पाताल से गहरी पहुंची लोकतंत्र की साख पर विपक्ष ने सवालिया निशान लगाए हैं। हमारी जो स्पिरिट है, जो सदन का इतिहास है, वह आपसी विश्वास से चलता है।
गृहमंत्री शाह ने आगे कहा कि, स्पीकर कस्टोडियन होता है। लोकसभा कैसे चलानी है, उसे लेकर इसी लोकसभा ने नियम बनाए हैं। हम अपने अधिकार के लिए बात कर सकते हैं, लेकिन नियमों के विपरीत बोलने का किसी को अधिकार नहीं है। लोकसभा के नियमों को नजरअंदाज करोगे, तब स्पीकर का पवित्र दायित्व है कि रोके, टोके और निकाल बाहर करे। ये नियम हमने नहीं बनाए। स्पीकर की निष्ठा पर जिस तरह से सवाल किए गए, वह निंदनीय है। हमारे लोकतंत्र में अनेक बार परिवर्तन आए हैं। हम ज्यादातर विपक्ष में ही बैठे हैं, लेकिन कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए।
Amit Shah Parliament Speech: गृहमंत्री शाह ने चर्चा के दौरान आगे कहा कि, हमने स्पीकर से कानूनी अधिकारों के संरक्षण की मांग भी की है। अब तक तीन प्रस्ताव आए। पहला 1954 में मावलंकर के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी, दूसरा प्रस्ताव समाजवादी पार्टी और तीसरा प्रस्ताव कांग्रेस लेकर आई थी। उन्होंने कहा कि, आज फिर कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है, सबने समर्थन किया है। मेरी पार्टी की मान्यता है कि स्पीकर की निष्ठा पर कभी भी शंका नहीं करनी चाहिए।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- आज इस महान सदन में लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है, इस पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए खड़ा हूं। ये कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। संसदीय राजनीति और इस सदन, दोनों के लिए यह अफसोस की बात है। (Amit Shah Parliament Speech) स्पीकर किसी दल के नहीं होते। सदन के होते हैं। सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं।
Amit Shah Parliament Speech: गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, चर्चा के लिए 10 घंटे तय हुए थे। फिर भी 13 घंटे चर्चा चली। 42 सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया। मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि स्पीकर की जब नियुक्ति हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाया था। इसका मतलब है कि स्पीकर के उनके दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और विपक्ष को उनका समर्थन करना है। इस दौरान विपक्ष के सांसद हंगामा करने लगे।
गृहमंत्री शाह ने कहा- आज विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवाल खड़ा किया है। लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है। पूरी दुनिया इस लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है। आमतौर पर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं आता है। चैंबर में बात हो सकती है। दिक्कतें दूर की जाती हैं, लेकिन यहां चैंबर में जाकर उनकी सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हैं।
Amit Shah Parliament Speech: गृहमंत्री शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए स्पीकर मध्यस्थता करवाते हैं। ये सदन कोई मेला नहीं है। इसके नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जब आप सदन के नियमों को नजरअंदाज करोगे, तो स्पीकर का दायित्व है कि इसे रोके और टोके। ये अधिकार ये नियम हमने नहीं बनाए।(Amit Shah Parliament Speech) ये नेहरू के समय में बने हैं।
अधिकारों के संरक्षण के लिए हम सहमत हैं लेकिन नियमों का क्या। सबको नियमों के अनुसार बोलना पड़ेगा, चाहे वह कोई भी हो। मतभेद तो सभी सदस्यों के हो सकते हैं, लेकिन स्पीकर के फैसलों पर शक नहीं कर सकते। कभी हमें अनुकूल नहीं लगेगा, कभी विपक्ष को अनुकूल नहीं लगेगा। लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना घोर निंदनीय है। जिसको मध्यस्थता करनी है, उसकी निष्ठा पर आप सवाल करते हो। ये बहुत अफसोस की बात है।
Amit Shah Parliament Speech: गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, हमारे लोकतंत्र में कई बार बदलाव हुए। बहुत कम समय हम सत्ता में रहे। ज्यादा विपक्ष में ही रहे। लेकिन भाजपा के विपक्ष में रहते कभी भी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया। स्पीकर की निष्ठा पर कभी शक नहीं करनी चाहिए, ये भाजपा की मजबूत सोच है। मैं राजनीतिक आरोप नहीं लगाऊंगा, लेकिन राजनीतिक आरोपों का जवाब कसकर दूंगा। स्पीकर की कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट भी दखल नहीं दे सकता। अध्यक्ष का पहला कर्तव्य है व्यवस्था और शिष्टाचार बनाए रखना।
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