अंकिता भंडारी हत्याकांड : वायरल वीडियो के सिलसिले में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार

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अंकिता भंडारी हत्याकांड : वायरल वीडियो के सिलसिले में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार

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  • Publish Date - June 15, 2026 / 06:51 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 06:51 PM IST

देहरादून/हरिद्वार, 15 जून (भाषा) उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के नाम के खुलासे से जुड़े वायरल ऑडियो-वीडियो क्लिप की जांच के सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तार किया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

पुलिस अधीक्षक (नगर) प्रमोद कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राठौर को हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र स्थित उनके कार्यालय से हिरासत में लिया गया और फिर देहरादून के डालनवाला थाने लाया गया, जहां उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

यह कार्रवाई राठौर की ओर से तीन दिन पहले किये गए संवाददाता सम्मेलन के बाद हुई है।

राठौर ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज चार प्राथमिकी में से दो को रद्द कर दिया है।

राठौर के खिलाफ ये प्राथमिकी मामले से जुड़े आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में दर्ज की गई थीं।

पूर्व विधायक ने कहा था कि डालनवाला और नेहरू कॉलोनी थानों में दर्ज बाकी दो मामलों की जांच जारी है। उन्होंने कहा था कि वह अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चार जून को इस मामले में राठौर के खिलाफ दर्ज चार प्राथमिकी में से दो को रद्द कर दिया था।

हालांकि, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने बाकी दो मामलों में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी थी।

शिकायतकर्ता दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने दलील दी थी कि उन्हें बदनाम करने के मकसद से संबंधित सामग्री जानबूझकर साझा की गई थी।

मामले में सार्वजनिक किए गए क्लिप में राठौर ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी गौतम की कथित तौर पर ‘वीआईपी’ के तौर पर पहचान की थी।

पुलिस के मुताबिक, गौतम ने पांच जनवरी को डालनवाला थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया कि हरिद्वार के शास्त्री नगर के रहने वाले राठौर (66) ने अभिनेत्री उर्मिला सनावर और कुछ राजनीतिक दलों के साथ मिलकर साजिश रची थी।

शिकायतकर्ता ने दावा किया कि आरोपी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बदनाम करने और जन आक्रोश भड़काने के लिए झूठे ऑडियो-वीडियो क्लिप तैयार किए।

पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश के लिए सजा), 336 (4) (जालसाजी), 353(2) (धार्मिक, जातीय या भाषाई समूहों के बीच घृणा और वैमनस्य फैलाने के इरादे से झूठी खबर, अफवाहें या भड़काऊ बयान प्रसारित करना) और 356(3) (मानहानिकारक सामग्री छापना या तैयार करवाना) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने बताया कि बाद में मामले की जांच के दौरान देहरादून पुलिस ने सबूतों और बयानों के आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 308(6) जोड़ी, जो जबरन वसूली से संबंधित है।

राठौर ने शुक्रवार को हरिद्वार में संवाददाताओं से बातचीत में इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई ऑडियो या वीडियो क्लिप जारी की थी या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई टिप्पणी की थी।

पूर्व विधायक ने कहा था कि अगर उनकी टिप्पणियों से किसी को दुख पहुंचा है, तो वह उस पर खेद जताते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए एक साजिश रची गई है।

राज्य सरकार में मंत्री देशराज कर्णवाल ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में उच्च न्यायालय से मिली राहत के बारे में राठौर के दावों को “गुमराह करने वाला” बताया था।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद राठौर को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में सुद्धोवाला जिला कारागार भेज दिया।

पौड़ी जिले के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 साल की अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को लापता हो गई थीं और छह दिन बाद ऋषिकेश में चीला नहर से उनका शव बरामद किया गया था।

इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। पुलिस ने मामले में रिजॉर्ट के मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में अंकिता की हत्या का दोषी ठहराया गया था।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप