कोलकाता, 15 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षर में कथित जालसाजी की जांच के सिलसिले में अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के अधिकारियों की एक टीम ने सोमवार को विधानसभा का दौरा किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि सीआईडी अधिकारियों की एक टीम अपराह्न करीब दो बजे विधानसभा पहुंची और माना जा रहा है कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के नाम वाले प्रस्ताव की प्रति के बारे में जानकारी हासिल करने के वास्ते अध्यक्ष के सचिवालय से संपर्क किया।
सीआईडी कई हफ्तों से प्रस्ताव वाले कागजात की तलाश कर रही है।
सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘जांच कई स्तर पर आगे बढ़ रही है। हम दस्तावेजी सबूतों की तलाश कर रहे हैं, बयानों की पुष्टि कर रहे हैं और घटनाओं का पूरा क्रम जानने की कोशिश कर रहे हैं। पूछताछ के दौरान सामने आई कुछ विसंगतियों पर गौर कर रहे हैं।’’
सीआईडी ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और तृणमूल के बेलेघाटा विधायक कुणाल घोष से रविवार को पूछताछ की थी। जांचकर्ताओं ने कई विधायकों से भी पूछताछ की है।
पिछले हफ्ते, सीआईडी के जांचकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के पास स्थित तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में तलाशी ली, लेकिन खबरों के मुताबिक उन्हें वह दस्तावेज नहीं मिला। उन्होंने शहर के दक्षिणी हिस्से में कामाक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के दफ्तर की भी तलाशी ली।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अभिषेक बनर्जी से बार-बार पूछा गया कि प्रस्ताव की प्रति कहां है, लेकिन जांचकर्ता कोई पुख्ता जानकारी नहीं जुटा पाए।
माना जा रहा है कि अभिषेक ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
रविवार को घोष और अभिषेक बनर्जी से संयुक्त रूप से पूछताछ के बाद, जांचकर्ताओं ने दस्तावेजी सबूतों के लिए अपनी खोजबीन का दायरा बढ़ाने का कथित तौर पर निर्णय लिया, जिसके बाद सोमवार को विधानसभा का दौरा किया गया।
सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘जांच के लिए, प्रस्ताव वाला दस्तावेज महत्वपूर्ण है। तथ्यों का पता लगाने के लिए हम संबंधित संस्थाओं से सभी उपलब्ध रिकॉर्ड और जानकारी जुटा रहे हैं।’’
छह मई को तृणमूल विधायकों ने ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बैठक की और विपक्ष के नेता पद के लिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा। खबरों के अनुसार, बैठक में मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर कथित तौर पर अपना समर्थन जताया।
हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा में पेश नहीं किया गया। तेरह और 14 मई को तृणमूल के नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ लेने के बाद, विधानसभा सचिवालय ने पार्टी से नेता प्रतिपक्ष पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का उल्लेख करते हुए एक प्रस्ताव मांगा था।
इसके बाद, 19 मई को एक बैठक हुई, जिसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज विधानसभा को सौंपा गया।
तृणमूल विधायकों द्वारा सौंपे गये अलग-अलग दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों में कथित तौर पर विसंगति पाए जाने के बाद सवाल उठाए गए।
इस मामले में, आखिरकार प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू हुई। राज्य की एजेंसी इस मामले के सिलसिले में कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है।
भाषा सुभाष सुरेश
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