Assam Citizenship Case: 15 दस्तावेज दिखाने के बाद भी नहीं मिला भारतीय नागरिक का दर्जा, जानिए क्यों? कोर्ट ने बताई वजह
Assam Citizenship Case: शख्स ने खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए पैन कार्ड, वोटर कार्ड, समेत 15 भारतीय दस्तावेज पेश किए थे।
Assam Citizenship Case/Photo Credit: AI Image
- हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दस्तावेज पेश करना पर्याप्त नहीं
- याचिकाकर्ता ने 15 दस्तावेज पेश किए, लेकिन रिकॉर्ड में नाम, उम्र और गांव से जुड़ी विसंगतियां सामने आईं
- अदालत ने कहा कि विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होती है
Assam Citizenship Case: असम के एक शख्स ने खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए पैन कार्ड, वोटर कार्ड, स्कूल सर्टिफिकेट समेत 15 भारतीय दस्तावेज पेश किए थे। इसके बावजूद भी वह अपनी नागरिकतय साबित नहीं कर पाया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज कर दी। कोर्ट के मुताबिक, दस्तावेजों में मौजूद जानकारी एक-दूसरे से मेल खाना भी जरूरी है।
Assam Citizenship Case याचिकाकर्ता ने बताया कि उनका जन्म 1 मई 1988 को असम के घुगुदोबा में हुआ था। उसके परिवार का नाम 1951 के एनआरसी रिकॉर्ड और पुराने वोटर लिस्ट में दर्ज था। परिवार कई साल पहले नदी कटाव की वजह से एक गांव से दूसरे गांव चला गया था। उसने बताया कि अलग-अलग गांवों में रहने के बावजूद परिवार के नाम लगातार सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होते रहे। दस्तावेजों में उनके पिता, माता और दादा के नाम की स्पेलिंग अलग-अलग लिखी हुई है।
मौखिक गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता: कोर्ट
मगर कोर्ट ने न ही याचिकाकर्ता की बात सुनी और न ही पिता की गवाही को भी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता साबित करने जैसे मामलों में मौखिक गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह रिकॉर्ड से साबित होना चाहिए। याचिकाकर्ता के कुछ डॉक्यूमेंट में पिता के डेट ऑफ बर्थ में गलती थी तो वहीं उनके कुछ वोटर आईडी कार्ड में उनका नाम सही नहीं था। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अलग-अलग दस्तावेजों में उनके पिता और दादा के नामों में कुछ मामूली गलती के कारण कोर्ट ने उन्हें विदेशी घोषित कर दिया।
रिकॉर्ड में मिले कई अंतर
Assam Citizenship Case विदेशी ट्रिब्यूनल ने जांच के दौरान नाम, उम्र और गांव की जानकारी में अंतर पाया। कुछ लोगों के नाम परिवार से जुड़े होने का कोई साफ सबूत नहीं मिला। वहीं, एक ही व्यक्ति की उम्र अलग-अलग वोटर लिस्ट में अलग दर्ज थी। रिकॉर्ड में धुबाकुरा, घुगुडोबा और हाशदोबा जैसे तीन अलग-अलग गांवों का भी जिक्र था। ट्रिब्यूनल ने माना कि ये अलग-अलग परिवार हो सकते हैं।
कोर्ट ने बताई वजह
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत यह साबित करने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होती है कि वह भारतीय नागरिक है। अदालत ने माना कि इस मामले में पेश किए गए 15 दस्तावेज और मौखिक गवाही इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए काफी नहीं थे।
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