गुवाहाटी, पांच जुलाई (भाषा) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में गश्ती सेवाओं में शामिल सबसे मशहूर हथिनियों में से एक जॉयमाला की तीन दशकों से अधिक समय तक वन्यजीव संरक्षण में सेवा देने के बाद मौत हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
लंबे समय से बीमार चल रही 66 साल की हथिनी की शनिवार रात उद्यान की अगोराटोली रेंज के नालोनी इलाके में मौत हो गई।
वर्ष 1960 में जन्मी जॉयमाला को 1992 में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) की गश्ती सेवा में शामिल किया गया था। उसने 34 वर्षों तक सेवा की और अवैध शिकार रोकने के लिए गश्त, वन्यजीवों की निगरानी, बचाव कार्यों और जंगल की सुरक्षा से जुड़े रोजमर्रा के कामों में हिस्सा लिया।
जॉयमाला ने 2004 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था, जब गश्त के दौरान एक बाघ उसके ऊपर से छलांग लगाकर निकल गया। इस घटना की एक तस्वीर दुनिया भर में व्यापक रूप से प्रकाशित हुई और यह काजीरंगा की गश्ती हाथियों तथा उनके महावतों के साहस का प्रतीक बन गयी।
असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने जॉयमाला को श्रद्धांजलि देते हुए उसे काजीरंगा के ‘सबसे बेहतरीन जंगल योद्धाओं’ में से एक और उन गश्ती हाथियों के खामोश बलिदान का प्रतीक बताया, जो पार्क की दुनिया भर में मशहूर जैव-विविधता की रक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करते हैं।
वन विभाग के कर्मचारी उस हथिनी को आखिरी विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए, जिसने दशकों तक उद्यान के वन्यजीवों की रक्षा की थी।
बरुआ ने कहा, ‘जब काजीरंगा अपने सबसे महान संरक्षकों में से एक को विदाई दे रहा है, तो जॉयमाला की हिम्मत, वफादारी और नि:स्वार्थ सेवा की विरासत हमेशा उद्यान के इतिहास में दर्ज रहेगी।’
भाषा शुभम सुरेश
सुरेश