नई दिल्ली। असम में भारतीय नागरिकत के सबूत के रुप में माने जा रहे नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) का दूसरा ड्राफ्ट जारी होते ही देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। संसद से लेकर सड़क तक इस पर बहस जारी है। इसके कारण संसद के दोनों सदन में हंगामे का दौर जारी है। इस लिस्ट के मुताबिक 40 लाख लोग ऐसे हैं, जो खुद को भारतीय नागरिक साबित नहीं कर सके हैं।
हालांकि सरकार के मुताबिक ये फाइनल लिस्ट नहीं है, लेकिन इस लिस्ट को देखकर हैरत भी होती है। इस लिस्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। उदाहरण के लिए देश के पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के कई परिजन इस देश के नागरिक नहीं है, क्योंकि उनका नाम इस लिस्ट में नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति के बड़े भाई एकरामुद्दीन अहमद के परिवार का नाम भी इस लिस्ट में शामिल नहीं है।
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इस बार में पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन के भतीजे ने कहा कि वे अभी और दस्तावेज पेश करेंगे। इसके अलावा असम के दक्षिण अभयपुरी के भाजपा विधायक का खुद का नाम इस लिस्ट में नहीं हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती, एक ओर इस लिस्ट में पूर्व राष्ट्रपति के परिजनों का नाम नहीं है लेकिन उग्र माने जाने वाले संगठन यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रमुख परेश बरूआ का नाम शामिल है। हालांकि, उनकी पत्नी बॉबी भुयान और दो बेटों अरिंदम और आकाश के नाम लिस्ट में नहीं है।
बता दें कि इस लिस्ट में 40 लाख लोगों का नाम न होने से उनके बीच भय का माहौल है। वे अपने भविष्य को लेकर सशंकित नजर आ रहे हैं। बांग्लादेश से सटे कई जिलों में तनाव का माहौल है।
वेब डेस्क, IBC24