गुवाहाटी, 19 फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 2027 की जनगणना में असमिया समुदाय ‘लगभग’ अल्पसंख्यक बन जाएगा।
शर्मा ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा कि वह ‘बहुत ही कठिन समय’ में राजनीति में हैं।
उन्होंने इस बारे में अधिक ब्यौरा दिये कहा, ‘‘2027 की जनगणना के दौरान, असमिया समुदाय लगभग अल्पसंख्यक बन जाएगा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली असम सरकार उस ‘दीपक’ को जीवित रखने की कोशिश कर रही है, जो ‘‘सभी को साहस’’ प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज धुबरी और माजुली दोनों जगहों से लोग मुझे फोन करके कहते हैं, ‘मैं सुरक्षित हूं।’ हम अल्पसंख्यक बनने की ओर अग्रसर हैं, लेकिन केवल एक दीपक ही प्रकाश और साहस प्रदान कर रहा है।’’
शर्मा ने इससे पहले भी कई मौकों पर दावा किया है कि अगर मौजूदा जनसांख्यिकी बदलाव जारी रही तो 2041 तक असम में मुसलमानों की आबादी लगभग हिंदुओं की आबादी के बराबर हो जाएगी।
जनगणना-2011 के अनुसार, असम में कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी जो राज्य के 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी। इसके मुताबिक असम में 1.92 करोड़ हिंदू थे।
भाजपा राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव को नियमित रूप से रेखांकित करती रही है। उसने दावा किया कि 2011 की जनगणना के अनुसार कम से कम नौ जिले मुस्लिम बहुल हो गए, जबकि 2001 में यह संख्या छह थी, और वर्तमान में यह संख्या बढ़कर कम से कम 11 हो गई है। हालांकि, 2021 में कोई जनगणना नहीं हुई थी।
आंकड़ों के मुताबिक 2001 की जनगणना के दौरान असम में 23 जिले थे जिनमें से छह जिले धुबरी (74.29 प्रतिशत), ग्वालपाड़ा (53.71 प्रतिशत), बारपेटा (59.37 प्रतिशत), नागांव (51 प्रतिशत), करीमगंज (52.3 प्रतिशत) और हैलाकांडी (57.63 प्रतिशत) मुस्लिम बहुल थे।
आंकड़ों के मुताबिक 2011 की जनगणना के दौरान राज्य में जिलों की संख्या बढ़कर 27 हो गई और उनमें से नौ जिलों में मुस्लिम बहुसंख्यक थे। मुस्लिम बहुल जिलों में धुबरी (79.67 प्रतिशत), ग्वालपाड़ा (57.52 प्रतिशत), बारपेटा (70.74 प्रतिशत), मोरीगांव (52.56 प्रतिशत), नागांव (55.36 प्रतिशत), करीमगंज (56.36 प्रतिशत), हैलाकांडी (60.31 प्रतिशत), बोंगाईगांव (50.22 प्रतिशत) और दरांग (64.34 प्रतिशत) शामिल हैं।
भाषा धीरज माधव
माधव