Avimukteshwaranand on Cow slaughter || Image- ANI Image File
कोलकाता: गौरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील रहने वाले हिन्दू धर्माचार्य, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अक्सर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं। कई मंचो पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेताओं पर गौहत्या के मामले में निशाना साध चुके है। (Avimukteshwaranand on Cow slaughter) वे भाजपा की सरकार पर गौहत्या को बढ़ावा देने और गौरक्षा के संकल्पों को भूल जाने का दावा करते रहें हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केंद्र की सरकार पर सनातनी हिन्दुओं को धोखा देने के भी गंभीर आरोप लगाते रहें हैं। हालांकि इस बार उनके निशाने पर कोई और नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी है।
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अविमुक्तेश्वरानंद का गुस्सा इस बार बंगाल के सीएम के खिलाफ फूटा है। उनकी यह नाराजगी प्रदेश सरकार की तरफ से बकरीद पर पशु वध के नए नियमों को लेकर सामने आया है। मीडिया के पूछे गए सवालों पर वह अचानक भड़क गए और कहा, “खबरदार! सुवेंदु अधिकारी… या तो गाय को माता मत कहो या पुरानी सरकारों की तरह ही पशु मानो” नीचे देखें वीडियो
“खबरदार! सुवेंदु अधिकारी… या तो गाय को माता मत कहो या पुरानी सरकारों की तरह ही पशु मानो”: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद #Avimukteshwaranand | #SuvenduAdhikari | Suvendu Adhikari | Avimukteshwaranand pic.twitter.com/rQ5xGIioKT
— IBC24 News (@IBC24News) June 18, 2026
दरअसल इस साल ईद-उल-अजहा के दौरान राज्य सरकार का “14 साल पुराने पशु के वध का नियम का नियम चर्चा में था। वह कोई नया कानून नहीं था, बल्कि पश्चिम बंगाल के पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के सख्त पालन से जुड़ा मामला था।
इन नियमों के मुताबिक़ राज्य के भीतर गाय, बैल, बछड़े, भैंस आदि पशुओं का वध बिना सरकारी प्रमाणपत्र के नहीं किया जा सकता। (Avimukteshwaranand on Cow slaughter) वही पशुवध की अनुमति के प्रमाणपत्र के लिए भी कई नियम तय किये गए है। मसलन जब पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का हो और प्रजनन या काम के लिए अनुपयुक्त हो, या उम्र, चोट, विकृति या असाध्य बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो।
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सत्ता परिवर्तन के बाद सीएम की कुर्सी सँभालने वाले सुवेंदु अधिकारी सरकार की तरफ से इसी वर्ष बकरीद से पहले राज्य सरकार ने इस पुराने कानून के पालन को लेकर विशेष निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद इस नियम की जमकर चर्चा हुई। कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। इस तरह 14 साल से कम उम्र के स्वस्थ गाय-बैल या संबंधित पशुओं के वध पर रोक और सरकारी फिटनेस/स्लॉटर प्रमाणपत्र की अनिवार्यता ही उस नियम का मूल आधार था। अविमुक्तेश्वरानंद के नाराजगी राज्य सरकार के पशु वध को लेकर तय इन्ही नियमों के खिलाफ था।
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