नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) देश-विदेश में बुधवार को 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया गया, जिसका मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम नागपुर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में साक्ष्य आधारित शोध, नवाचार, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने में आयुर्वेद की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
“स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय के तहत आयोजित समारोह में आयुष सेवा क्षेत्र पर पहली रिपोर्ट, आयुष दृष्टि 2030, औषधीय पौधों से संबंधित सुरक्षा डोजियर, त्वचा रोगों के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश और सीसीआरएएस-एजीएनआई आकलन पैमाना वेब पोर्टल जारी किया गया।
कार्यक्रम में पढ़े गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संदेश में कहा गया कि परंपरा से ज्ञान, साक्ष्य और नवाचार तक आयुर्वेद की यात्रा आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने में योगदान देगी।
उन्होंने आयुर्वेद की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच का भी उल्लेख किया और कहा कि आयुष वीजा सुविधा के माध्यम से विदेशी नागरिक भारत में आयुष पद्धतियों के तहत उपचार करा सकते हैं।
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य देखभाल जन आंदोलन बनना चाहिए।
जाधव ने कहा कि आयुर्वेद स्वास्थ्य को बनाए रखने के साथ-साथ रोगों के उपचार पर भी जोर देता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) द्वारा तैयार आयुष सेवा क्षेत्र रिपोर्ट इस क्षेत्र का आकलन प्रस्तुत करती है, जबकि आयुष दृष्टि 2030 रिपोर्ट पारंपरिक चिकित्सा के विकास और वैश्विक विस्तार का खाका पेश करती है।
नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में आयुर्वेद चिकित्सक, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और आयुष संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चाओं में साक्ष्य, शोध, नवाचार, गुणवत्ता और सामुदायिक कल्याण जैसे विषय प्रमुख रहे।
कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रीय औषधीय पौधा प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थानों की पहल और उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
भारत के बाहर भी विभिन्न देशों में आयुर्वेद दिवस मनाया गया। मुख्य समारोह से पहले मंत्रालय ने बताया था कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9,700 से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 10 देशों और क्षेत्रों से भी भागीदारी दर्ज की गई।
भाषा अमित सुरेश
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